पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

अररिया जिला का इतिहास:बिहार के तत्कालीन सीएम जगन्नाथ मिश्र ने की थी जिले बनाने की घोषणा

अमित कुमार अमन | अररिया8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • महाभारत और मौर्य-गुप्त वंश काल से जुड़ा है अररिया जिला का इतिहास

गुरुवार को अररिया जिला 31 साल का हो जाएगा और 32वें में प्रवेश कर जाएगा। अररिया को जिला का दर्जा दिलाने के लिए लंबी संघर्ष भी चली थी।कितनो को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।अररिया जिला का इतिहास बहुत ही पुराना है और मौर्य-गुप्त वंश से भी इतिहास जुड़ा हुआ है।

जिला मुख्यालय स्थित अंगीभूत कॉलेज अररिया कॉलेज स्थापित करने के लिए आंदोलनकारियों ने ही आजाद एकेडमी में कव्वाली करवाया था। जानकर बताते हैं कि अरण्य नाम से बना अररिया कालांतर में यह क्षेत्र मुगल शासकों के अधीन था। जबकि मौर्य काल में सम्राट अशोक के शासन में अररिया और आस पास का इलाका था। उसके बाद तो गुप्त वंश का शासन रहा था। 1738 ईo में पूर्णिया के मिलिट्री गवर्नर सैफ खान ने राजा नन्द लाल को यहाँ का प्रशासक नियुक्त किया था।

.अररिया जिला का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा है । यही नहीं इस पिछड़े जिले के इतिहास में द्वापर युग के कई तार भी जुड़े हैं। जब मकर सक्रांति के दिन 14 जनवरी 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र शहर के एनसीसी ग्राउंड(अब समाहरणालय परिसर) में अररिया को जिला का दर्जा देने की घोषणा की थी ।

14 जनवरी 1990 से पहले पूर्णिया के अधीन था अररिया
अररिया और किशनगंज जिला 14 जनवरी 1990 से पहले पूर्णिया जिला के अधीन था और उस वक्त अररिया अनुमंडल हुआ करता था। इससे पहले 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद शासन प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए अंग्रेजों ने अररिया को सन 1864 में अनुमंडल का दर्जा दिया था। तकरीबन 126 साल बाद अररिया को जिला का दर्जा नसीब हुआ।

अररिया बस्ती के नाम से जिले का नामकरण का है महत्व
लगभग 31 लाख की आबादी वाले इस जिले के नाम में भी कई ऐतिहासिक तर्क है। कोई अरण्य से अररिया बताता है तो कोई अररिया बस्ती पंचायत से नामकरण को जोड़ कर देख रहा है। दिवंगत इतिहासकार डॉ प्रो अशोक कुमार झा कहते थे कि इतिहास कहता है कि जिला मुख्यालय से आठ किमी दूर अररिया बस्ती में सन 1865 में मुंसिफ कोर्ट और पुलिस स्टेशन की स्थापना हुई थी। लेकिन यह इलाका बाढ़ से हमेशा तबाह होता था तो अंग्रेजों ने सन 1875 में वहां से मुख्यालय हटाकर अररिया ले आये। इतिहासकारों की माने तो अबुल फजल ने अपने ‘ आईने अकबरी ‘ में इस जिले के श्रीपुर और सुल्तानपुर परगना का विस्तृत वर्णन किया है। इस किताब में जिले की सांस्कृतिक कल्चर, सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द की बातों का भी जिक्र है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आपने अपनी दिनचर्या से संबंधित जो योजनाएं बनाई है, उन्हें किसी से भी शेयर ना करें। तथा चुपचाप शांतिपूर्ण तरीके से कार्य करने से आपको अवश्य ही सफलता मिलेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल पर ज...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser