जिला स्थापना दिवस आज:अररिया को जिले का दर्जा दिलाने के लिए चली थी 21 वर्ष लंबी लड़ाई... आठ साल तक फणीश्वरनाथ रेणु ने निभाई थी अपनी अहम भूमिका

अमित| अररिया8 दिन पहले
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  • जानिए अररिया को जिले का दर्जा दिलाने की संघर्ष की कहानी, कोरोना के कारण इस बार नहीं होंगे कोई कार्यक्रम
  • जिला बनाओ संघर्ष समिति की बैठकों में शामिल होते थे रेणु और साहित्यिक गतिविधियों से भी लोगों में अलख जगाते थे
  • 1969 से ही शुरू हुआ था जिले के लिए लोगों का संघर्ष

आज अररिया का जिला स्थापना दिवस है। इस बार स्थापना दिवस पर कोई कार्यक्रम नहीं होंगे। अररिया को जिले का दर्जा दिलाने के लिए लोगों ने 21 साल तक लंबी लड़ाई लड़ी थी। मैला आंचल की धरती को पूर्णिया से अलग करने के लिए 1969 से ही लोगों ने संघर्ष शुरू कर दिया था। साहित्यकारों की इस धरती पर अररिया का लंबा इतिहास रहा है। लम्बी लड़ाई और खूब संघर्ष के बाद आखिरकार 14 जनवरी 1990 को सफलता हाथ लगी और अररिया को पूर्णिया से अलग कर जिला का दर्जा दिया गया। इस संघर्ष में कथा शिल्पी भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1969 से शुरू हुए संघर्ष में फणीश्वरनाथ रेणु भी शामिल थे। 47-48 साल के रेणु उस वक्त जिला बनाओ संघर्ष समिति की बैठकों में शामिल होते थे और अपनी साहित्यिक गतिविधियों के जरिये भी लोगों में अलख जगाते थे। लोग बताते हैं कि रेणु के इस तरह से लोगों को जागरूक करने पर संघर्ष समिति से लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया। उनके इसी योगदान और साहित्यिक उपलब्धियों की वजह से आज वैश्विक स्तर पर उनका नाम है। सिमराहा में बने इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रेणु के नाम पर कर दिया है। यही नहीं 15 करोड़ की लागत से सिमराहा में रेणु उपवन बनाने की भी घोषणा हुई है। 11 अप्रैल 1977 को रेणु जी का निधन के बाद संघर्ष समिति का आंदोलन जारी रहा।

वरिष्ठ अधिवक्ता हंसराज प्रसाद ने भी जिला बनाने के लिए कई आंदोलन किए थे
1990 के दशक में नगरपालिका चेयरमैन रहे और वरिष्ठ अधिवक्ता हंसराज प्रसाद के संयोजकत्व में ही जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ था। अब तो 33वें स्थापना दिवस समारोह में हंसराज प्रसाद नहीं हैं। पिछले साल ही उनकी मौत हो गयी।उस वक्त हंसराज प्रसाद बताते थे कि संघर्ष समिति ने कई तरह के आंदोलन किए और इसमें हर वर्ग और हर शख्स का साथ मिला था। उस आंदोलन की खासियत यह थी कि इसमें सभी दलों के जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के प्रातिनिधि, पत्रकार जगत के लोग, अधिवक्ता, चिकित्सक, बुद्धिजीवी समेत तमाम लोग एक मंच पर थे। सभी के मन में बस एक ही सोच थी कि अररिया को कैसे जिला का दर्जा दिलाया जाए। 33वें साल में जिले को प्रवेश होने पर जिलेवासियों को खुशी जरूर है लेकिन इस बार उन्हें एक दुःख यह है कि इस बार स्थापना दिवस में संघर्ष समिति के संयोजक रहे हंसराज बाबू अब इस दुनिया मे नहीं हैं।

जिला अररिया एक नजर में
जिले का दर्जा : 14 जनवरी 1990
लोकसभा क्षेत्र : 1
कुल विधानसभा क्षेत्र : 6
कुल अनुमंडल : 2
कुल प्रखण्ड : 9
कुल अंगीभूत कॉलेज : 2
कुल पंचायत : 211
कुल नगर निकाय : 6
कुल जिला परिषद क्षेत्र : 30
कुल राजस्व गांव : 751
कुल क्षेत्रफल : 2830 वर्ग किमी
कुल आबादी : 2811569(2011 अनुसार)
कुल साक्षरता दर : 53.53%
कुल थाना/ओपी : 26
पहले डीएम : एके चौहान

अररिया को जिला बनाने की घोषणा करते डॉ. जगन्नाथ मिश्र। जिस जगह से उन्होंने यह घोषणा की थी, वहीं कलेक्ट्रेट बना है।
अररिया को जिला बनाने की घोषणा करते डॉ. जगन्नाथ मिश्र। जिस जगह से उन्होंने यह घोषणा की थी, वहीं कलेक्ट्रेट बना है।

जिले का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले कई लोग अब नहीं रहे
तीन वैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहे, जिन्होंने जिला बनाने के आंदोलन में पूरा सहयोग दिया था। दिवंगत सांसद मो. तस्लीमुद्दीन, डॉ. प्रो अशोक कुमार झा और डॉ नवल किशोर दास ने संघर्ष समिति में अमूल्य योगदान दिया था। डूमर लाल बैठा, हलीमउद्दीन अहमद, सरयू मिश्र, अजीमुद्दीन, मो. मोइदुर्रह्मान, सत्यनारायण यादव, शीतल गुप्ता, श्रीदेव झा, डॉ आजम, बुन्देल पासवान, मो. यासीन, अनिल बोस, वासिकुररहमान, रुद्रानंद मण्डल, रामेश्वर यादव, लालचंद सहनी, पंडित रामाधार द्विवेदी, रघुनाथ राय, रत्न लाल गोयल, शम्स जमाल, मो. नसीर, नेमचंद की भूमिका रही थी।

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