तैयारी:छठ में चार दिन शेष, घाटों की साफ-सफाई हुई शुरू

बांका22 दिन पहले
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ओढ़नी नदी स्थित तैयार छठ घाट। - Dainik Bhaskar
ओढ़नी नदी स्थित तैयार छठ घाट।
  • आठ नवंबर को नहाय-खाय, 10 को पहला अर्घ्य
  • छठ घाटों पर बैरिकेडिंग का है निर्देश

दीपों का त्योहार दीपावली संपन्न हो चुका है, जिला प्रशासन के द्वारा लोक आस्था के महापर्व की तैयारी प्रारंभ कर दी है। छठ व्रत को लेकर नदियों में घाटों का निर्माण लोग खुद भी कर रहे है। जिला प्रशासन के द्वारा भी शहर के साथ-साथ जिले के विभिन्न नदी, तालाबों में छठ घाट का निर्माण कार्य व साफ-सफाई का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। शहर के चांदन नदी व ओढ़नी नदी घाट पर जिला प्रशासन के द्वारा तैयारी कराई जा रही है, तो वहीं जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों के प्रमुख घाटों को भी तैयार कराना प्रारंभ कराया जा रहा है। दूसरी तरफ अब छठ व्रत के गीतों से भी क्षेत्र गुंजायमान होने लग गया है। जानकारी हो कि इस साल आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा 8 नवंबर सोमवार से प्रारंभ होने जा रहा। आठ नवंबर को नहाय-खाय होगा, जबकि 9 नवम्बर को खरना का व्रत होगा। जिसके बाद व्रती निर्जला उपवास रखकर 10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्यदान करेगी। 11 नवम्बर की सुबह उदयमान भगवान भास्कर को अर्ध्यदान के साथ महापर्व का समापन होगा।

लाइटिंग व शौचालय की व्यवस्था होगी दुरुस्त
शुक्रवार को बीडीओ डॉ. संजय कुमार ने ग्रामीण क्षेत्र के कई छठ घाट का निरीक्षण किया। कटेली गांव, हरपुर, पिपरा, सन्हौला गांव में ओढ़नी नदी किनारे छठ घाट का निरीक्षण करते हुए ककवारा पंचायत के मुखिया पूजा रंजन के प्रतिनिधि सुनील यादव को सभी घाटों पर साफ-सफाई व महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनवाने की जिम्मेदारी दी गयी। घाट पर लाइटिंग व शौचालय बनाने का निर्देश दिया गया है। चांदन नदी व ओढ़नी नदी किनारे जितने भी घाट होंगे वहां बांस बल्ले लगाकर वहां लाल कपड़ा लगाने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार चलना जरूरी

निर्धारित मार्गों पर चले व गाड़ियां निर्धारित स्थान पर पार्क करें।
महिलाओं/बुजुर्गों के पास अपने घर का पता और फोन नंबर हो।
यदि आप छोटे बच्चों का छठ पर्व में घाटों पर लेकर जा रहे है, तो उनके जेब में (या गले में लॉकेट की तरह) घर का पता एवं फोन नम्बर अवश्य रख दें।
अगर आवश्यक हो तो हेल्पलाइन नंबर 06424-223001 पर फोन करके बात करें।
अफवाहें न फैलाएं न उन पर विश्वास करें।
बैरिकेडिंग को न पार करें और खतरनाक घाटों की ओर या गहरे पानी में न जायें।
छठ पूजा क्षेत्र में कहीं भी आतिशबाजी न करें।
किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएं।

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