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बौंसी मेला:आज भ्रमण पर निकलेंगे भगवान मधुसूदन मंदार की तलहटी में जुटे सफाहोड़ धर्मावलंबी

बांका11 दिन पहले
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  • कोरोना की वजह से प्रशासन ने मेले पर लगाई रोक, झारखंडर, बंगाल व ओडिशा से पहुंचते हैं श्रद्धालु

बिहार, झारखंड, बंगाल, उड़ीसा का सर्वाधिक लोकप्रिय बौंसी मेला तो इस वर्ष नहीं लगा लेकिन मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार रात से ही मंदार में सफाहोड़ धर्मावलंबियों का धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गया है। वहीं गुरुवार सुबह से ही सनातन धर्म के अनुयायियों का भी यहां जमावड़ा लगने लगेगा।

ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति मंदार की तलहट्‌टी में अवस्थित पापहरणी सरोवर में स्नान करता है, वे सारे रोगों से मुक्त हो जाते है और सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है। इस कारण मंदार में मकर संक्रांति के अवसर पर डुबकी लगाने वालों का दिन भर तांता लगा रहता है। श्रद्धालु पापहरणी सरोवर में स्नान करने के बाद मंदार व लक्ष्मी नारायण मंदिर में दर्शन पूजन करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर श्रद्धालुओं को कोरोना के गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया गया है।

हर्षोल्लास के साथ निकाली जाएगी भगवान मधुसूदन की शोभा यात्रा
इस बार गुरुवार को मकर संक्रांति के अवसर पर बौंसी स्थित मधुसूदन मंदिर से सजे सजाये वाहन पर भगवान मधुसूदन को सवार कर मंदार लाया जाएगा। जहां मंदार पर्वत की परिक्रमा करायी जाएगी। इस दौरान श्रद्धालु भगवान की एक झलक पाने के लिए मंदार पर्वत के पास कतारबद्ध खड़े रहते हैं और जय मंदार जय मधुसूदन के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो जाता है। मंदार की परिक्रमा और भगवान की पूजा के बाद उन्हें पुन: मधुसूदन मंदिर ले जाया जाता है और भक्तिपूर्ण माहौल में पूजा अर्चना की जाती है। जिला प्रशासन ने इस दौरान कोरोना के गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन करने का श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है।

गंगा जल से भी ज्यादा पवित्र मंदार का मानते हैं जल
सफाहोड़ धर्मावलंबी मंदार में 13 जनवरी की रात से ही अपना धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर देते हैं। इस कड़ाके की ठंड की रात में पापहरणी में डुबकी लगाकर अपने ईष्ट देव की पूजा अर्चना करते हैं, जो अपने आप में एक मिशाल है। सुबह होते ही मंदार पर्वत और लक्ष्मी नारायण मंदार में पूजा अर्चना के साथ मंदार पर्वत के पश्चिमी छोर में धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसके पश्चात प्लास्टिक के डब्बे में पापहरणी का जल भरकर अपने साथ घर ले जाते हैं। वे लोग गंगा जल से भी ज्यादा पापहरणी के जल को पवित्र मानते हैं। उनलोगों का कहना है कि जब कभी परिवार के किसी सदस्य का तबीयत खराब होता है तो पापहरणी का जल पिलाया जाता है, जिसे पीने के बाद बीमार व्यक्ति ठीक हो जाता है।

कोरोना के कारण मंदार व पापहरणी में इस बार लोगों की भीड़ रहेगी कम
प्रशासनिक स्तर पर इस बार मंदार महोत्सव सह बौंसी मेला काेरोना के कारण नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे में बौंसी मेला, मधुसूदन मंदिर, मंदार पर्वत और पापहरणी में अपेक्षाकृत भीड़ कम रहेगी। सफाहोड़ धर्मावलंबी भी दूर दराज वाले अपने रिश्तेदारों और पहचान के लोगों को मंदार नहीं आने की अपील की है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर पापहरणी में मुकम्मल व्यवस्था की गयी है ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो सके।

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