जिले में शिक्षा की बदइंतजामी:एक शिक्षक के सहारे चल रहा स्कूल, छुट्टी जाने पर लटकता ताला

बांकाएक महीने पहले
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मंगलवार को शिक्षक के छुट्‌टी पर चले जाने के कारण प्राथमिक विद्यालय करहरिया में लटका मिला ताला। - Dainik Bhaskar
मंगलवार को शिक्षक के छुट्‌टी पर चले जाने के कारण प्राथमिक विद्यालय करहरिया में लटका मिला ताला।
  • शिक्षकों का टोटा, मात्र दो शिक्षक के भरोसे 157 बच्चों की शिक्षा, अभिभावकों में रोष

बांका जिला के सरकारी स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा बेईमानी साबित हो रहा है। स्कूलाें में शिक्षकाें और समुचित शिक्षा के अभाव के कारण जहां बच्चाें की पढ़ाई बाधित हाेती है, वहीं एेसे भी कई विद्यालय देखने काे मिल जाएंगे, जहां एक स्कूल परिसर में दाे-दाे विद्यालय संचालित हाे रहा है। इसके अतिरिक्त कहीं भवन का अभाव, ताे कहीं शिक्षकाें की कमी विद्यालयों में देखी जा रही है। वार्ड नंबर 11 स्थित प्राथमिक विद्यालय काली स्थान के परिसर में हीं प्राथमिक विद्यालय भयहरण स्थान के स्कूल का भी संचालन हाे रहा है। दाेनाें ही स्कूल में महज एक-एक शिक्षक तैनात हैं, जिनके छुट्टी पर जाते ही स्कूल पूरी तरह से बंद हाे जाता है और विद्यालय में ताला लटक जाता है। मंगलवार काे भी यहीं हाल देखने को मिला। ऐसे में इन विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के अभिभावक काफी आक्रोशित हैं। प्राथमिक विद्यालय भयहरण स्थान की शिक्षिका जहां 13 से 17 दिसंबर तक छुट्टी पर है, जिसकी वजह से स्कूल बंद है। वहीं प्राथमिक विद्यालय काली स्थान स्कूल में भी एक ही शिक्षक हैं। जिनके छुट्टी पर रहने के कारण मंगलवार काे दोनों विद्यालय बंद मिला। स्कूल में नामांकित बच्चाें का पठन-पाठन बाधित हाे गया है। जब शहरी क्षेत्र के विद्यालय की स्थिति यह है, तो सुदूर क्षेत्र के विद्यालय की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

एक-एक कमरे में चलती है 1 से 5 पांचवीं तक की कक्षा

बच्चाें काे प्राथमिक शिक्षा देने के लिए सरकारी स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सरकार अलग-अलग प्रोग्राम संचालित करती है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करने के लिए अभियान चलाया जाता है लेकिन बांका में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शिक्षा विभाग के वरीय के अधिकारी का इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं है। शिक्षा देने के लिए जहां विद्यालय में शिक्षकाें का अभाव है, वहीं संसाधनाें की कमी से भी स्कूल जूझ रहा है। एक विद्यालय भवन में जहां दाे विद्यालय का संचालन हाे रहा है, ऊपर से दाेनाें विद्यालय एक-एक कमरे में ही संचालित हाेता है। दाेनाें विद्यालय में कक्षा 1 से पांचवीं तक के बच्चाें का नामांकन है और राेजाना बच्चे स्कूल भी आते हैं, जिन्हें एक ही कमरे में बैठाकर पहले से पांचवी तक के बच्चाें काे पढ़ाया जाता है। दोनों विद्यालय में 157 बच्चे नामांकित हैं यानि करीब 80 बच्चों को एक कमरे में भेड़ बकरी की तरह ठूंस की पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में शिक्षा और उसके स्तर का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

कई बार शिक्षा विभाग से शिकायत पर नहीं मिल रहे स्कूल को शिक्षक
दोनों स्कूल के प्रभारी एचएम द्वारा शिक्षा विभाग को जब भी छुट्‌टी का आवेदन दिया जाता है, इस बात से जरुर अवगत कराया जाता है कि उनके छुट्‌टी में चले जाने पर स्कूल पूरी तरह से बंद हो जाएगा और स्कूल में ताला लटक जाएगा। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के द्वारा ना तो वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाती है, और ना ही स्कूल में शिक्षकों की ही प्रतिनियुक्त की जा रही है। जबकि दोनों स्कूल के एचएम मंजर आलम व शिक्षिका अंजना कुमारी के द्वारा कई बार विभाग को भी स्कूल में शिक्षक की पदस्थापना की मांग की गई है, लेकिन अबतक स्कूल को शिक्षक नहीं मिले है। ऐसे में दोनों विद्यालय में नामांकन 157 बच्चों का पढ़ाई बाधित होता है। मालूम हो कि प्राथमिक विद्यालय काली मंदिर में 89 बच्चे 1-5 में नामांकित हैं जबकि भयरहरण स्थान प्राथमिक विद्यालय में 68 बच्चे नामांकित हैं।

शिक्षकों की हुई प्रतिनियुक्ति
स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए शिक्षकों को प्रतिनियुक्त करा दिया जाएगा, ताकि किसी भी परिस्थिति में स्कूल बंद ना हो।
-निशित प्रणित सिंह, डीपीओ, बांका

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