एजुकेशन भास्कर / कोरोना संकट के बीच विपरीत परिस्थितियों में जीत की कहानी सुपर-30 के आनंद कुमार के शब्दों में

The story of victory in adversity amid Corona crisis In the words of Anand Kumar of Super-30
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The story of victory in adversity amid Corona crisis In the words of Anand Kumar of Super-30

  • एक समय घर का गुजारा भी था मुश्किल, पर डटा रहा, आज अमेरिका में है इंजीनियर

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

बांका. बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है चिरंजीव। चार भाइयों का परिवार था और पिता हरे राम गुप्ता के पास कमाई का कोई मजबूत जरिया नहीं था। खेती के बूते पर एक गाय पाल ली थी। यही परिवार के भरणपोषण का सहारा था। मां शीला देवी दसवीं तक पढ़ी थीं और पढ़ाई की अहमियत उन्हें बखूबी मालूम थी। उनकी आंखों में चिरंजीव के लिए एक ही सपना था कि वह पढ़-लिख कर इंजीनियर बन जाए।

मगर एक गाय के भरोसे जिंदगी का गुजारा करने वाले परिवार में यह कैसे संभव था? चिरंजीव की योग्यता ने इसे संभव बनाया। योग्यता थी गणित के जटिल सवालों को आसानी से हल करने की। सरकारी स्कूल से मैट्रिक पास करने के बाद जब वह पहली बार मेरे पास आया तो इसी काबिलियत ने उसे सुपर 30 का हिस्सा बना दिया। 

साधनहीन सरकारी स्कूल में उसे गणित के मुश्किल सवालों को खुद हल करने का अभ्यास करना पड़ता था क्योंकि अक्सर टीचर होते ही नहीं थे। यह अभ्यास उसे गणित की गहराइयों में ले गया। वह कम्प्यूटर साइंस पढ़ना चाहता था। मैंने उसे बताया कि इसके लिए रैंक अच्छी लानी होगी। वह भिड़ गया। पलटकर नहीं देखा। लक्ष्य तय हो चुका था। सभी सहपाठियों का कहना था कि चिरंजीव बहुत आगे जाने की क्षमता रखता है।

इस प्रोत्साहन ने चिरंजीव के सपनों को और बल दिया। 2010 आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में उसकी रैंक वैसी ही आई, जैसी उसके सपने के पूरे होने के लिए जरूरी थी। आईआईटी बीएचयू में उसका दाखिला हुआ। कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई उसने मन लगाकर की। कैम्पस इंटरव्यू में उसका चयन मोबाइल बनाने वाली एक प्रतिष्ठित कंपनी ने किया। वह ऐसे मोबाइल डिजाइन करने की तरफ कदम बढ़ा चुका था, जो लोगों को देखते ही लुभा लें। सैमसंग में काम करने के साथ-साथ वह कुछ और भी बड़ा करने के लिए हमेशा सोचता रहता था।

एक दिन चिरंजीव ने फोन किया और कहा कि सर अब डिजिटल दुनिया का जमाना है। सुपर 30 ने मेरे लिए इतना कुछ किया है, मैं भी कुछ करना चाहता हूं। अब मैं सुपर 30 के दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐप बनाना चाहता हूं। चिरंजीव नौकरी करते हुए भी लगातार मेहनत करता रहा और एक दिन उसकी खुशियों का ठिकाना नहीं था जब अमेरिका की बहुत ही प्रतिष्ठित कंपनी से उसे ऑफर आया। आज चिरंजीव अमेरिका में काम कर रहा है। गाय के भरोसे पलने वाले परिवार में आज खुशियों का डेरा है। चिरंजीव की कहानी का सार यही है कि मीठे फल का इंतजार ज्यादा लंबा नहीं करना होगा। 

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