आस्था:‘सभी ग्रंथों का सार है श्रीमद्भागवत पुराण’

बरियारपुर2 महीने पहले
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  • बरियारपुर में आयोजित हो रहा श्रीमद्भागवत कथा पुराण

श्रीमद् भागवत कथा पुराण में सभी ग्रन्थों का सार है और यही एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें भगवान की सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है। यह बाते हम सभी जानते हैं और हर कथाओं में सुनने को भी मिलती है। मगर कथा श्रवण के बाद उस पर अमल करने से ही पुण्य प्राप्त होता है। यह उद्बोधन कला रामपुर पंचायत के रामधन मंडल टोला गांव में स्थानीय ग्रामीणों एवं पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया विनोद मंडल के सौजन्य से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं रामायण प्रसंग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन कर्ता नंदन बाबा ने कही। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण’ में बार-बार श्रीकृष्ण के ईश्वरीय और अलौकिक रूप का ही वर्णन किया गया है। पुराणों के लक्षणों में प्राय: पाँच विषयों का उल्लेख किया गया है। किन्तु इसमें दस विषयों-सर्ग-विसर्ग, स्थान, पोषण, ऊति, मन्वन्तर, ईशानुकथा, निरोध, मुक्ति और आश्रय का वर्णन प्राप्त होता हैं। श्रीकृष्ण के गुणों का बखान करते हुए कहा गया है कि उनके भक्तों की शरण लेने से किरात् हूण, आन्ध्र, पुलिन्द, पुल्कस, आभीर, कंक, यवन और खस आदि तत्कालीन जातियां भी पवित्र हो जाती हैं। कलिकाल में ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ हिन्दू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यन्त सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं। कथा के दौरान सुधीर मंडल, भैरव मंडल, गोरेलाल मंडल, भैरव शर्मा आदि के साथ बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।

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