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यास तूफान से सब्जी उत्पादक किसानों को हुआ भारी नुकसान:बारिश से खेतों में जमा पानी, खीरा, कद्दू, परवल, नेनुआ, टमाटर के पौधे हो रहे पीले, उत्पादन घटा तो कीमत हुई दोगुनी, किसानों ने की मुआवजे की मांग

बरियारपुर22 दिन पहले
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  • बारिश से पहले हर दो-तीन दिन पर होती थी सब्जी की तुराई, अब मात्र एक चौथाई रह गया है उत्पादन

चक्रवाती तूफान यास के कारण पिछले चार-पांच दिनों में हुई बारिश से सब्जी उत्पादक किसानों की कमर टूट गई है। खेतों में पानी जमा होने से लत्तीदार सब्जी जैसे खीरा, परवल, कद्दू, नेनुआ, करेला के साथ मिर्च, बैगन, भिंडी के उत्पादन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। खेतों में दो-तीन दिन लगातार पानी जमे रहने के कारण पौधे पीले पड़ गए हैं। तापमान में भी 5 से 7 डिग्री की गिरावट हुई। ऐसे में खासकर लतर वर्गीय सब्जी उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। चक्रवाती तूफान के पूर्व जब मौसम अनुकूल था तो किसान अपने खेतों से 2 से 3 दिनों के अंतराल पर लगातार सब्जी की तुराई कर अच्छी मात्रा में सब्जी बाजार भेज रहे थे। लेकिन तूफान के बाद उत्पादन एक चौथाई रह गई है। परवल की कीमत चक्रवाती तूफान के पूर्व जो 20 रुपए किलो हुआ करती थी वह 40 हो गई। भिंडी की कीमत जो 10 थी वह अब 20 रुपए प्रति किलो हो गई।

अगली फसल तैयार होने में कम से कम 7-8 दिन लगेगा
किसान रासबिहारी शर्मा, प्रमोद मंडल, सुशील शर्मा, रोहित कुमार, विनय शर्मा, रामानंद शर्मा आदि ने बताया कि चक्रवाती तूफान ने उनलोगों की कमर ही तोड़ दी है। फिलहाल खेतीबाड़ी से कोई आमदनी का स्रोत नहीं रह गया है। अगली फसल की तैयारी के लिए भी 7 से 8 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि खेतों में जल जमाव है। खेत पूरी तरह से गीली है। हम किसान लाचार एवं बेबस हो गए हैं।

आकलन कर किसानों को दिया जाए मुआवजा
कोरोना संक्रमण काल में तंगी का दंश झेल रहे किसानों को यास चक्रवात के कहर ने कहीं का नहीं छोड़ा। खासकर सीमांत किसान और गरीब तबके के लोगों को इसके कारण और अधिक आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। इसको लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मो. असद ने सरकार का ध्यान इस प्राकृतिक आपदा की ओर आकृष्ट कराते हुए कहा कि लगातार तीन दिनों तक चली तेज आंधी और बारिश की वजह से कच्चे खपरैल के मकान ध्वस्त हो गए हैं। वहीं खेतों में लगी मक्का, परवल, ननुआ, खीरा सहित अन्य हरी सब्जियों की फसल के साथ ही आम एवं लीची को काफी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में सरकार को किसानों को हुई क्षति की भरपाई करनी चाहिए। वहीं आईटी सेल के जिलाध्यक्ष ई. रोहित मणि भूषण ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह आपदा विभाग के माध्यम से किसानों को हुई क्षति का आकलन कर प्रभावितों के बीच क्षतिपूर्ति की राशि का अविलंब वितरण कराए।

खेतों में जमा पानी की करें निकासी
इधर कृषि समन्वयक चन्द्रआलोक कुमार ने बताया कि सभी किसान सर्वप्रथम खेतों से अतिरिक्त जल की निकासी कर ले। खेतों में उग आए खरपतवार को निकालकर पौधे के आसपास मिट्टी को भुरभुरा बना ले। खरीफ मौसम में होने वाली सब्जियां एवं धान की पौधशाला तैयार करने हेतु प्रयास शुरू कर दें।

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