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निर्देश:दीक्षा पोर्टल पर शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य छोटे-छोटे खंडों में 50 कोर्स किए गए हैं तैयार: डीईओ

बिहारीगंज17 दिन पहले
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आयोजित बैठक में उपस्थित विभिन्न विद्यालयों के एचएम व अन्य। - Dainik Bhaskar
आयोजित बैठक में उपस्थित विभिन्न विद्यालयों के एचएम व अन्य।
  • आज से दीक्षा एप पर जिले के शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए शुरू होगा कोर्स
  • बारी-बारी से कोर्स सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा, लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई

जगन्नाथ झंवर बालिका उच्च विद्यालय के सभागार में अनुमंडल स्तरीय उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापक की बैठक हुई। अध्यक्षता डीईओ जगतपति चौधरी ने की। इस अवसर पर डीईओ जगतपति चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सात जून को दीक्षा एप पर शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कोर्स शुरू होगा। छोटे- छोटे खंडों में लगभग 50 कोर्स तैयार किए गए हैं। सर्वप्रथम गणित विषय से मुद्रा की अवधारणा आधारित कोर्स का प्रशिक्षण शुरू होगा, जिसमें छह प्रकार की सामग्री होगी। इसलिए सभी शिक्षकों को ये कोर्स करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे अन्य विषय भी आएंगे और बारी-बारी से ये कोर्स सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य होंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में फाउंडेशन लिटरेसी और अंकीय पद्धतियों पर विशेष फोकस किया गया है। इसलिए शिक्षकों के लिए इन कोर्सों को कराने के क्रम में उपरोक्त कोर्स की प्राथमिकता होगी। विदित हो कि पिछले एक साल से कोरोना को लेकर स्कूल बाधित होने की बार- बार परिस्थितियां बनती जा रही हैं। इस कारण शिक्षक और बच्चे बिल्कुल खाली न बैठें। इस हेतु अब फेस टू फेस के अतिरिक्त ऑनलाइन शिक्षा को अपनाना शिक्षकों के लिए आवश्यक बन गया है। शिक्षा विभाग बिहार सरकार के द्वारा सात जून 2021 से प्राथमिक शिक्षा निदेशक डॉ. रंजीत कुमार सिंह एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल सिंह के द्वारा विधिवत प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाएगा। जिसमें प्रशिक्षण के लिए सभी शिक्षकों को दीक्षा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना है। उक्त कार्यक्रम में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बिहारीगंज अरुण कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मुरलीगंज सूर्य प्रसाद, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उदाकिशुनगंज निर्मला कुमारी, जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ कृष्ण कुमार, बीआरपी शिवराज राणा एवं अनुमंडल के उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापक शामिल हुए।

एक सप्ताह में आदेश नहीं मिलने पर करेंगे उग्र आंदोलन
मधेपुरा |
बीएनएमयू के अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने कुलपति से ग्रीष्मावकाश के उपरांत पुनः वर्ग आरंभ कराने हेतु आदेश निर्गत करने की मांग की है। सप्ताह के भीतर क्लास में भाग लेने का आदेश नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञात हो कि शिक्षकों के कमी को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार नियमित बहाली के अहर्ता पर राज्यभर के विश्वविद्यालयों में अतिथि सहायक प्राध्यापक की बहाली ली गई। बीएनएमयू के अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के संयोजक डॉ. राजीव जोशी, बिहार राज्य अतिथि सहायक संघ के राज्य प्रतिनिधि डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सुमंत राव, डॉ. अर्जुन कुमार, डॉ. कौशल किशोर चौधरी, डॉ. राघवेंद्र कुमार, डॉ. अनुजा कुमारी, डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. मिंकी सिंह, डॉ. डेजी कुमारी, साधना कुमारी आदि ने कहा कि हम लोग जल्द ही नियमितीकरण की मांग न करने लगे इसीलिए हमलोगों को साल के बारह महीने में ग्रीष्मावकाश के एक महीने पठन पाठन से दूर रखकर वेतन से वंचित रखने का नियम बनाया गया है। बीएनएमयू में भी लगभग 180 अतिथि सहायक प्राध्यापकों की बहाली ली गई। इनलोगों में कुछ विषय के बहाली का तो 18 माह भी होने को चला है। जिसमें इन शिक्षकों का कार्यकलाप काफी सराहनीय रहा है। अब हाल में सरकार ने वेतन को बढ़ाते हुए 1500 रुपए प्रति वर्ग और महीने में अधिकतम 50000 कर दिया है। कुलपति बीएनएमयू डॉ. आरकेपी रमण को एक आवेदन देकर अविलंब पुनः वर्ग लेने का आदेश निर्गत किए जाने की मांग की है।

अनुदान की राशि नहीं देना अमानवीय : प्रो. चंद्रशेखर

मधेपुरा | सरकार ने विवि को वित्त रहित कॉलेजों में काम करने वाले शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मियों के मानदेय के लिए लगभग 27 करोड़ रुपए दो माह पूर्व ही भेज दिया, जिसे विवि ने कॉलेजों के खाते में भेज दिया गया है। बावजूद इसके कॉलेज प्रबंधन की मनमानी से शिक्षकों के बीच अनुदान की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जो दुखद ही नहीं बल्कि अमानवीय भी है। उक्त बातें राजद विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने कही। प्रो. शेखर ने कहा कि अगर वित्त रहित कॉलेजों के प्राचार्य उक्त अनुदान की राशि का वितरण शीघ्र नहीं करते हैं तो इस संबंध में सीएम नीतीश कुमार से मिलकर बात की जाएगी। ऐसे प्राचार्यों पर कार्रवाई भी कराने का आग्रह सीएम समेत शिक्षा मंत्री से किया जाएगा।
विधायक ने बताया कि जानकारी मिली है कि कोरोना संक्रमण से कई कॉलेजों के शिक्षकों का निधन महज इसलिए हो गया कि वे रुपए के अभाव में बेहतर इलाज नहीं करा पाए। उन्होंने कुलपति डॉ. आरकेपी रमण से आग्रह किया कि अनुदान की राशि तत्काल वितरित करने का सख्त निर्देश दें। उन्होंने वीसी से यह भी आग्रह किया है कि कॉलेज के आंतरिक स्रोत से होने वाली आय से भी 70 प्रतिशत राशि कॉलेजकर्मियों के बीच वितरित करने का निर्देश दिया जाए। ताकि वे अपनी और अपने परिवार की जिंदगी बचा सकें।

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