त्यौहार:विरासत को बचाने वाली दीपावली

बौंसी23 दिन पहले
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  • लखदीपा मंदिर: जहां कभी दीपावली पर एक साथ जला करते थे एक लाख दीपक
  • मंदार पर्वत के पूर्वी भाग में स्थित लखदीपा को संरक्षित कर विकसित करने की जरूरत

तस्वीर लखदीपा मंदिर की है, जहां कभी दीपावली पर एक साथ एक लाख दीपक जलाए जाते थे। कांलातर में यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गया। दीपावली के मौके पर घर और प्रतिष्ठान के साथ-साथ मंदार पर्वत के पूर्वी भाग स्थित पौराणिक लखदीपा मंदिर में घी के दिए जलाकर श्रद्धालुओं ने धूमधाम से दीपावली मनाई। प्रशासनिक स्तर से इस मंदिर के लिए कोई काम नहीं किया गया। लोगों ने लखदीपा मंदिर में लोगों ने चारों तरफ साफ-सफाई करवाई। इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि कभी यहां एक लाख दिए जलाए जाते थे। पिछले आठ साल से इस मंदिर में दीप कार्यक्रम कर रहे राजाराम अग्रवाल ने कहा कि लखदीपा मंदिर संस्कृति का पहचान है और इस धरोहर को संरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। भगवान मधुसूदन मंदिर में पारंपरिक तरीके से दीपावली मनाई गई। दीपावली को लेकर तैयारियां जोरों पर है। प्रात:काल से ही मधुसूदन मंदिर को सजाया जा रहा था। शाम को मंदिर में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के पुजारी पंडित उदय चंद्र झा एवं लक्ष्मण झा ने भगवान की विशेष पूजा अर्चना की। भक्तजनों ने अपने साथ लाए घर से दिए भगवान के समक्ष जलाए। उसके बाद घर ले जाकर रोशन किया। पूरा मंदिर मिट्टी के बने दिए से जगमग कर रहा था। बौंसी बाजार में भी दीपावली उत्साह पूर्वक मनाई गई। फोटो एंड कंटेंट: माखन सिंह

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