जय मंदार जय मधुसूदन...:मधु कैटभ को दिए वरदान को पूरा करने भ्रमण पर निकले भगवान

बौंसी12 दिन पहले
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मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान मधुसूदन की शोभा यात्रा शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए निकाला गया। इस दौरान जय श्री राम का जयघोष करते हुए महात्मा भोली बाबा की कीर्तन मंडली आगे-आगे चल रही थी। वहीं पीछे-पीछे श्रद्धालु जय मंदार जय मधुसूदन का जयकारे लगा रहे थे, जिससे पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा था। गाजे-बाजे उत्साह और भजन कीर्तन के माहौल में सांवरिया सरकार गरुड़ रथ के सिंहासन पर सवार होकर मंदार भ्रमण को निकले। भगवान के रथ को सजाया संवारा गया था। इस दौरान अपने क्षेत्राधिकारी के दर्शन के लिए भक्त आतुर रहे। मंदार की तराई में अवस्थित मंदिर में भगवान को दर्शन के लिए रखा गया, उसके बाद संध्या समय उन्हें मधुसूदन मंदिर वापस लाकर सिंहासन पर विराजमान करते हुए मुख्य पंडा द्वारा पूजा अर्चना की गई।

साल में दो बार भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं भगवान, श्रद्धालु समृद्धि की करते हैं कामना

कथा के अनुसार भगवान मधु कैटभ राक्षस को वरदान दिए गए थे कि मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल मंदार तुम्हें दर्शन देने आएंगे। दिए गए वरदान को पूरा करने के लिए हर साल भगवान मधुसूदन को रथ पर सवार कर मंदार पर्वत ले जाया जाता है, जहां थोड़ी देर श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन के बाद उन्हें पुन: वापस मधुसूदन मंदार लाकर पूजा अर्चना की जाती है। दूसरी ओर भगवान साल में दो बार अपनी जनता का हाल जानने मंदिर परिसर से निकलते हैं। पहला मकर संक्रांति के दिन जबकि दूसरा जून या जुलाई माह में होने वाले रथ रात्रा के समय। जगन्नाथपुरी की तरह भगवान मधुसूदन की यात्रा निकाली जाती है। इस दौरान श्रद्धालु उनसे समृद्धि की कामना करते हैं।

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