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विस चुनाव:गोड्डा, भागलपुर के बाद बांका संसदीय सीट में शामिल धोरैया का विकास नहीं

धोरैया12 दिन पहले
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  • आरक्षित सीट धोरैया के चुनावी रण में हैं 11 उम्मीदवार, 28 को वोटिंग
  • बीते 20 वर्षों से धोरैया की जनता ने जदयू प्रत्याशी को चुना है अपना उम्मीदवार, इस बार मुकाबला कड़ा
  • धोरैया में पांच बार कांग्रेस, पांच बार सीपीआई और चार बार जदयू काे जनता ने दिया माैका

विस चुनाव के पहले चरण में धोरैया में मतदान होना है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर इस बार 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। जिसमें मुख्य मुकाबला एनडीए से निवर्तमान जदयू विधायक मनीष कुमार और महागठबंधन से राजद प्रत्याशी सह पूर्व विधायक भूदेव चौधरी में होने की चर्चा है। इस सीट पर बीते दो दशक से जदयू का कब्जा है। पिछले चुनाव में भी मनीष कुमार और भूदेव चौधरी आमने-सामने थे, लेकिन उस वक्त की स्थिति अलग थी। उस वक्त भूदेव एनडीए से रालोसपा प्रत्याशी थे जबकि मनीष कुमार महागठबंधन से जदयू प्रत्याशी। महागठनबंधन में दोनों क्षेत्रीय पार्टी के एक साथ होने के कारण एनडीए प्रत्याशी को हार का समाना करना पड़ा था। धोरैया की जनता ने पांच बार कांग्रेस, सीपीआई तो चार बार जदयू प्रत्याशी को नेता चुना। एक बार निर्दलीय विधायक ने जीत हासिल की। धोरैया सीट पर 1951 से लेकर 1971 तक कांग्रेस जीतती रही, भले ही इस दौरान कांग्रेस के प्रत्याशी बदलंे। पहली बार 1951 में जहां कांग्रेस के पशुपति सिंह, 1957 एवं 1962 में मौलाना शमीनउदीन तो 1967 में सिंघेश्वर मंडल ने जीत दर्ज की थी। लेकिन 1969 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रामचन्द्र भानु ने कांग्रेस के किले में छेद कर जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1972 में भाकपा के नरेश दास ने कांग्रेस के गढ़ को ध्वस्त करते हुए लगातार 1999 तक 23 वर्ष में 5 बार यहां के विधायक रहे, हालांकि इस दौरान 1985 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के रामरूप हरिजन ने भाकपा को शिकस्त दिया था।

भूदेव के सांसद बनने पर मनीष को मिला मौका | 2000 के विस चुनाव में जदयू ने कांग्रेस व भाकपा के अवैध किले में सेंधमारी कर विजयी पताका लहराया दिया था। इस चुनाव में भाकपा के प्रत्याशी रहे नरेश दास को जदयू के भूदेव चौधरी ने शिकस्त दी थी। तब से यह सीट जदयू के कब्जे में है। जदयू प्रत्याशी के रूप में भूदेव चौधरी 2000 एवं 2005 में जीत दर्ज की उसके बाद जमुई के सांसद बन जाने के कारण धोरैया की सीट से 2010 एवं 2015 में मनीष कुमार विजयी रहे।

राजनीतिक अस्थायीत्व के कारण नहीं हुआ विकास | अनुसूचित जाति के लिए करीब चार दशक से आरक्षित धोरैया विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक व प्रशासनिक रूप से हमेशा उपेक्षित रहा है। यह विधानसभा क्षेत्र करीब तीन दशक तक बांका जिले से कटा-कटा सा रहा। कभी यह विधानसभा गोड्डा तो कभी भागलपुर संसदीय क्षेत्र से जुड़ा था। 2009 के लोकसभा चुनाव से यह क्षेत्र बांका संसदीय क्षेत्र में शामिल हुआ है। नतीजतन राजनीतिक स्थायित्व के अभाव में इस क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाया।
शिक्षा, सड़क, सिंचाई व स्वास्थ्य चुनावी मुद्दा

क्षेत्र में शिक्षा, जर्जर सड़क, सिंचाई का अभाव व स्वास्थ्य सुविधा का बुरा हाल है। इन्हीं समस्याओं को मतदाता मुद्दा बनाएंगे। विस की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना हिरंबी बांध से किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा। सगुनिया गांव के पास गेरूआ नदी में स्थल नापी के बाद भी चेक डेम का निर्माण नहीं हो पाया।

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