परेशानी:ठंड व कुहासे से तापमान में गिरावट आलू में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ा

दिघलबैंक6 दिन पहले
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अधिक ठंड और कुहासे के कारण झुलसा रोग से ग्रस्त आलू की फसल। - Dainik Bhaskar
अधिक ठंड और कुहासे के कारण झुलसा रोग से ग्रस्त आलू की फसल।
  • फसल को बचाने के लिए मैंकोजेब 75% पानी में घोलकर छिड़काव करें

प्रखंड क्षेत्र में ठंड और कुहासे के कारण तापमान के लगातार गिरावत के कारण आलू की फसलों में झुलसा रोग का प्रकोप दिखने लगा है। जिससे किसान अपने आलू के पैदावार को लेकर काफी चिंतित हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक दिनों से पछिया हवाओं के साथ ठंड और कुहासे के बीच मंगलवार की रात और बुधवार को दिनभर रुक-रुक बारिश होने से आलू की फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू हो गया है। आलू की फसलों में झुलसा रोग से बचाव की जानकारी देते हुए कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि झुलसा का प्रकोप प्रायः फसल के नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा के असंतुलन मात्रा में प्रयोग से होता है। इस रोग का लक्षण सबसे पहले निचले पत्तियों पर दिखाई देता है ऊपर की पत्तियां झुलस कर सुख जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब वातावरण में तापमान 10 से 25 डिग्री सेल्सियस, आद्रता 80 प्रतिशत से अधिक हो एवं रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो तो रोग का फैलाव तीब्रता से होती है। इसलिए इस रोग का समय से उचित प्रबंधन अपनाने से अच्छी उपज लिया जा सकता है। आलू से फसल के बचाव के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत घुलनशील 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का ढाई किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव कर किसान आलू में लगने वाले झुलसा रोग से बचा सकते हैं। झुलसा रोग के लक्षण लगते ही पत्तियों के किनारे व सिरे पर तथा तना पर हल्के भूरे रंग के या बेंगनी रंग दिखाई पड़े तो समझना चाहिए कि पीछेती झुलसा का प्रकोप है। फसल को बचाने के लिए किसान को 10 से 15 दिन के अंतराल पर मैंकोजेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव करने से झुलसा रोग से बचाया जा सकता है।

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