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कनकई नदी की बदली धारा तो निर्माणाधीन पुल धंस गया:अच्छा हुआ पुल धंस गया उद्‌घाटन के बाद धंसता तो सैकड़ों जानें जा सकती थीं, सिर्फ एप्रोच पथ बनना था बाकी

दिघलबैंक3 दिन पहले
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  • प्रखंड के पत्थरघट्टी पंचायत के गुवाबाड़ी में एक करोड़ से बना पुल, 40 हजार की आबादी को होता लाभ पहले 26 मीटर की धारा बहती थी, पर नदी की धारा बदलने से अब 70 मीटर की चौड़ाई में बह रहा पानी

दिघलबैंक प्रखंड के पत्थरघट्टी पंचायत के गुवाबाड़ी में कनकई नदी के एक मरिया धार (बरसाती धार) पर बन रहा पुल धंस गया है। पुल बनकर तैयार था एवं इसके एप्रोच पथ के बन जाने के बाद इसका उद्घाटन होना था। ऐसा कनकई नदी की धार बदल दिए जाने के कारण हुआ है।

पुल का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग टू के द्वारा कराया जा रहा था। मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से 26 मीटर स्पेन वाले उक्त पुल का निर्माण कराया जा रहा था। विगत एक सप्ताह से रुक रुक कर हो रही बारिश के कारण कनकई नदी उफान पर है।

इसके अलावे इस नदी ने अपना रास्ता बदल लिया और इसकी मुख्य धार इसी पुल के नीचे से बहने लगी। पुल के धंस जाने से एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है जिन्हें बरसात के बाद पुल तैयार हो जाने पर सुलभ यातायात का भरोसा था, उन्हें झटका लगा है।

स्थानीय ग्रामीण कैसर आलम, आजम, हिमायूं सहित अन्य लोगों ने बताया कि मंगलवार से कनकई नदी में गुवाबाड़ी के पास बना नव निर्माणाधीन पुल पानी के तेज बहाव में टिक न सका और देखते ही देखते पुल पानी के तेज बहाव में धंस गया। ग्रामीणों ने बताया कि पुल लगभग बनकर तैयार हो गया था, पुल का दोनों तरफ एप्रोच बनना बाकी था। इस पुल के बन जाने से ग्वालटोली, गुवाबाड़ी, दोदरा सहित दर्जनों गांव के लिए काफी सहूलियत होती पर बनते ही नदी के बहाव के चपेट में आ गया।

26 मीटर स्पेन वाले पुल का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग टू की ओर से किया जा रहा

पुल से यहां होता फायदा

गुवाबाड़ी, दोदड़ा, ग्वाल टोली, पत्थरघट्ठी, कूढ़ेली, टेढ़ा गाछ प्रखंड के दर्जनों गांव 40 हजार से अधिक लोगों को होती सहूलियत

हर दो साल पर नदियां बदलती रास्ता
जिले में नदियां हर साल दो साल बाद अपनी धारा बदलती रहती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय से निकलने के बाद नदी मैदान में आती है। किशनगंज के एक ओर हिमालय की शृंखला है। पहाड़ पर एवं इन नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश होने के अलावे अगर मैदान में भी बारिश होती है तो ये नदियां उफना कर विकराल रूप धारण कर लेती है। नदी की गहराई कम है एवंयहां हमेशा फ्लश फ्लड ही आता है। पानी तेज बहाव के साथ आती है और आगे निकल जाती है। मुख्य नदी महानंदा है एवं कोल, कनकई, डोंक, मेची आदि इसकी सहायक नदियां है। सभी नदियां बरसात में विकराल हो जाती है जबकि अन्य दिनों में इसमें पानी बेहद कम रहता है।

मंझौक में महानंदा ने बदली धारा
इसी वर्ष जुलाई-अगस्त महीने में महीनगांव पंचायत में मंझौक के पास महानंदा नदी ने नई धारा बना ली। इसके पूर्व बहादुरगंज-टेढ़ागाछ पथ पर लौचा में पुल निर्माण का कार्य चार वर्ष विलंब इसी कारण से हुआ कि वहां बहनेवाली कौल नदी ने धारा बदल ली थी। यहां वर्ष 2012 में सीएम नीतीश ने लौचा पुल का शिलान्यास किया था। इसे 2014 में तैयार हो जाना था लेकिन 2014 में नदी ने धारा बदल ली एवं पुल के एक छोर के आगे से बहने लगी। फिर 2019 में बनकर तैयार हो सका।

विशेषज्ञों की टीम करेगी मुआयना
गुवाबाड़ी में निर्माणाधीन पुल के धंस जाने के बाद अब आगे क्या होगा, यह पूछे जाने पर ग्रामीण कार्य विभाग टू के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि जल्द ही तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच कर मुआयना करेगी। अब तक मिली जानकारी के अनुसार नदी ने नया धार बना लिया है एवं पुल के नीचे और दोनों ओर से इसका बहाव होने लगा है। इस लिहाज से निर्माणाधीन पुल काफी छोटा पड़ गया है। तकनीकी विशेषज्ञों के रिपोर्ट के आधार पर यहां नए सिरे से पुल का डिजाइन और निर्माण कराया जाएगा। वहीं ग्रामीण कार्य विभाग टू के अधिकारी ने कहा कि जहां पानी के बहाव का दबाव नहीं होता वैसी जगहों पर बनने वाले पुल के पिलर राफ्ट नींव पर आधारित होते हैं जो जमीन से डेढ़ मीटर गहरा होता है।

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