पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

माह-ए-रमजान:‘जकात इस्लाम-ए-दीन के लिए एक अहम रुक्न’

फलका2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • फलका में माहे रमजान के चौथे अलविदा जुमा की नमाज अकीदत के साथ की गई अदा

खुदा पाक की महीना माहे रमजान के चौथे व अंतिम अलविदा जुमा की नमाज फलका प्रखंड अंतर्गत पोठिया, महेशपुर, सालेहपुर, राजधानी, दयालपुर, भरसिया, पीरमोकाम, बड़ी चातर , मघेली , लक्ष्मीपुर, लोहजर समेत फलका विभिन्न गांव में अकीदत के साथ अल्लाह के बंदे व रोजेदारों ने लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने अपने घरों में सोशल डिस्टेंस के साथ अदा की। अलविदा जुमा की नमाज को लेकर सुबह से ही मुसलमान भाई बहन व बच्चियां घर आंगन की साफ सफाई रंगरोगन में लगे हुए थे। वहीं मस्जिदों में इमाम मोअज्जिन व खादिम ने ही नमाज पढ़ी। महेशपूर मस्जिद के इमाम मो. शब्बीर अहमद कासमी ने कहा कि रोजा से मोहब्बत करने वालों को रमजान के विदा होने पर बेहद अफसोस हो रहा होगा कि पता नहीं हम में से कौन सा शख्स फिर इस पाक मुकद्दस महीना उन्हें फिर से नसीब हो सकेगा की नहीं। उन्होंने जकात सदका ए फित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जकात इस्लाम- ए- दीन के लिए एक अहम रुक्न है।

जकात से इंकार करने वाला है फासिक व गुनाहगार
अल्लाह पाक ने मालदारों पर जकात फर्ज किया है। जकात से इंकार करने वाला फासिक और गुनाहगार है, व कयामत के दिन बहुत बड़ी सजा का हकदार होगा। हदीश के हवाले से उन्होंने आगे बताया कि सोना, चांदी रखने वाला अगर इसका जकात न निकाले तो कयामत के रोज सजा देने के लिये सोने व चांदी की तख्तियां बनाई जायेगी, फिर उनको दोजख (नर्क) की आग में तपाकर पसलियों के पेशानी तथा पुश्त पर रखी जाएगी। आगे उन्होंने सदका ए फित्र पर जानकारी देते हुए कहा कि जकात पर गरीब- मिस्कीनों का हक है। जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़ेसात तोला सोना या इतनी ही मिलकियत का मलिक हो। माल की मिकदार का चालीसवां हिस्सा यानि ढाई प्रतिशत राशि गरीबों, मिस्कीनों, यतीमों में बांटे क्योंकि इस धन पर केवल इन्हीं का हक है। वहीं सदका ए फित्र हर साहब ए नसाब पर वाजिब है। उन्होंने आगे कहा कि े बताया ति फितरा की रकम न अदा करने वाले का रोजा जमीन व आसमान के बीच लटकता रहता है। बहरहाल रमजान अब खात्में की ओर है। लोग ईद की तैयारी में मशगूल नजर आ रहे हैं। ईद को लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

खबरें और भी हैं...