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बाढ़ की आशंका:नेपाल में भारी वर्षा के बाद कोसी बराज से 1.18 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज, सहमे लोग

फारबिसगंजएक महीने पहले
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बढ़ने लगा बकरा नदी का जलस्तर। इसी को देखकर लोगों में भय का माहौल। - Dainik Bhaskar
बढ़ने लगा बकरा नदी का जलस्तर। इसी को देखकर लोगों में भय का माहौल।
  • जिले में नेपाल से परमान, बकरा, रतुआ और नूना नदी होती है प्रवाहित

नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने फारबिसगंज सहित सीमाई इलाके के लोगों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के कारण नेपाल से होकर जिले में बहने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होना शुरू हो गया है। कोसी नदी में भीमनगर कोसी बराज से 1 लाख 18 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हुआ। जबकि बीते दिनों 87 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ था। \इसके साथ ही कोसी समेत नेपाल से होकर भारतीय क्षेत्रों में प्रवाह होने वाली नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी शुरू हो गई है। जिससे बाढ़ का संकट भारतीय सीमाई इलाकों में होने की संभावना बढ़ गई है। बाढ़ की आशंका से लोग सशंकित होने लगे हैं। बता दें कि फारबिसगंज सहित जिला में नेपाल से होकर परमान, बकरा, रतुआ और नूना नदियों का प्रवाह होता है। नेपाल में लगातार हो रही बारिश से इन इलाकों से होकर बहने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होना शुरू हो गया है। जिससे सीमाई इलाके के लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सशंकित होने लगे हैं। इधर, बिहार का शोक कही जाने वाली नदियों के जलस्तर में भी दो दिनों से बढ़ोतरी देखी जा रही है। पानी छोड़े जाने के बाद और नेपाल सहित तराई इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण ग्रामीणों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है।

डेढ़ हजार से अधिक की आबादी, बकरा से प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन पहले जोगिंदर गांव से रमरई गांव बारात आई थी रास्ता नहीं होने के कारण बारात को वापस लौटना पड़ा। बड़ी कठिनाई से दूल्हे को बाइक पर सवार कर लड़की वाले निकाह के लिए गांव ले गए। ग्रामीणों ने बताया कि अगर कच्ची सड़क को ही मरम्मत करा दिया जाए तो थोड़ी मुश्किल आसान हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि जोकीहाट से तस्लीम उद्दीन बिहार सरकार के मंत्री से लेकर गृहराज्य मंत्री तक रहे। बावजूद ये इलाका आज भी बदहाल है। अभी भी यहां की डेढ़ हजार से ज्यादा की आबादी को विकास का इंतजार है। तारण पंचायत के रमरई गांव के लोग इस बात से परेशान हैं कि बारिश की शुरुआत हो चुकी है। अब बकरा नदी का जलस्तर बढ़ जाएगा और ये गांव टापू में तब्दील हो जायेगा। एसडीओ शैलेश चन्द दिवाकर बारिश के दिनों में मनरेगा योजना से सड़क मरम्मत कराने की बात कर रहे हैं।

बकरा नदी के पानी से 8 माह टापू बन जाता रमई गांव

जोकीहाट| पुल और रास्ता नहीं रहने के कारण जोकीहाट का रमरई गांव साल के आठ महीने बकरा नदी से घिरा रहता है। पूल नहीं होने की वजह से यहां के लोग अपनी जिंदगी खतरों में डालकर नदी पार करते हैं। ये स्थिति तकरीबन आठ महीनों तक रहती है। आवागमन की बेहतर सुविधा नहीं होने से लोग इलाज नहीं करा पाते हैं। सबसे बड़ी मुशीबत शादी विवाह में होती है। रमरई गांव के हाजी मुहीउद्दीन, हाजी अनवार, हाजी मोजिब इस्लाम, वार्ड सदस्य रईस अब्दुर्रहीम, मस्तकीम आदि ने बताया कि सड़क टूटी रहने और पुल के बिना यहां कोई बारात लेकर नहीं आता है। गांव तक पहुंचने का सड़क नहीं रहने के कारण लड़कियों की शादी अच्छी जगह नहीं हो पाती है। बताया कि कई लड़कियों की तो बारात भी नदी किनारे से ही लौट गई है।

फारबिसगंज समेत जिले के क्षेत्रों में आती है बाढ़
फारबिसगंज सहित अररिया जिला बाढ़ प्रभावित इलाका है। हरेक साल बढ़ भारी तबाही मचाती है। मुख्य रूप से नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण पहाड़ी नदियों से पानी के प्रवाह के कारण अररिया में बहने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होती है और फिर परमान, बकरा, नूना और रतुआ जैसी नदियां उफान पर आकर बाढ़ ले आती है। एसडीएम सुरेंद्र कुमार अलबेला ने कहा कि पूरे अनुमंडल में संभावित बाढ़ के मद्देनजर प्रशासनिक व्यवस्था फ़ाइनल स्टेज में है। ऊंचे शरण स्थल की पहचान कर ली गई है।

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