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PHC प्रभारी का ‘सुसाइड’ सुन रेफरल प्रभारी को हार्ट अटैक:पिछली बार कोविड सेंटर बना तो हुआ था कोरोना, फिर तैयारी देख सरकारी आवास में दी जान

जमुईएक वर्ष पहले
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अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने गिद्धौर अस्पताल प्रभारी को मृत घोषित कर दिया। - Dainik Bhaskar
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने गिद्धौर अस्पताल प्रभारी को मृत घोषित कर दिया।
  • जमुई में अभी 3 एक्टिव केस, आशंका देख सरकार करा रही तैयारी
  • सुसाइड करने वाले डॉक्टर और रेफरल प्रभारी की थी पुरानी पहचान

जमुई के स्वास्थ्य महकमे से मंगलवार को दो बड़ी और बुरी खबरें सामने आईं। सुबह गिद्धौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के प्रभारी डॉ. रामस्वरूप चौधरी (50) ने ‘कोरोना’ को वजह बताते हुए सरकारी आवास में सुसाइड कर लिया। कुछ घंटे बाद 40 किलोमीटर दूर यह जानकारी चकाई रेफरल अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश प्रसाद (55) तक पहुंची तो सुनते ही उन्हें हार्ट अटैक आ गया। रेफरल प्रभारी को वहां से 65 किलोमीटर दूर जमुई मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल लाया गया। हालांकि वे अब खतरे से बाहर हैं।

PHC के लिए ड्राइवर लेने पहुंचा तो कमरे में लटके मिले

गिद्धौर PHC प्रभारी डॉ. रामस्वरूप चौधरी (50) के ड्राइवर ओम प्रकाश रावत ने बताया कि “हर दिन की तरह वह मंगलवार सुबह 10 बजे डॉक्टर साहब को लेने उनके आवास पर गए। काफी देर बीतने के बाद भी डॉक्टर साहब बाहर नहीं आए तो मैंने घर जाकर उनकी पत्नी से पूछा कि आज साहब ऑफिस नहीं जाएंगे? उनकी पत्नी ने कहा कि वह तो काफी देर पहले ही ऑफिस के लिए निकल चुके हैं। लेकिन, मैंने कहा कि नहीं ऐसी बात नहीं है। फिर जांच करने पर पता चला कि डॉक्टर साहब के कमरे का गेट अंदर से बंद था। काफी आवाज दिया, गेट खटखटाया लेकिन फिर भी कमरे के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद गेट को तोड़कर कमरे में घुसे तो दंग रह गए। डॉक्टर साहब फंदे से लटक रहे थे।” घरवालों ने कमरे में फंदे से उतारकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई।

मृतक डॉ. रामस्वरूप चौधरी। (फाइल फोटो)
मृतक डॉ. रामस्वरूप चौधरी। (फाइल फोटो)

बढ़ते कोरोना पर VC के बाद से चिंतित थे PHC प्रभारी

पुलिस पूछताछ में मृत डॉक्टर के परिजनों ने कहा कि काम के प्रेशर से काफी परेशान होकर खुदकुशी की है। भास्कर ने प्रेशर को समझने की कोशिश की तो सामने आया कि कोरोना का प्रभाव दोबारा बढ़ने की आशंका से वह परेशान थे। जमुई में फिलहाल 3 एक्टिव केस और 5 कंटेनमेंट जोन हैं। राज्य मुख्यालय से स्वास्थ्य विभाग की VC में कोरोना को लेकर तैयारी दुरुस्त रखने कहा गया था। गिद्धौर PHC में भी पिछली बार कोविड केयर सेंटर बना था और वहीं लोगों का इलाज करने के दौरान डॉ. रामस्वरूप चौधरी खुद कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। आइसोलेशन और अपने ही अस्पताल के इलाज में वह ठीक हो गए थे, लेकिन कोरोना का असर उनके मन-मस्तिष्क पर बहुत ज्यादा था।

मृत डॉ. रामस्वरूप चौधरी ने मरने से पहले यही सुसाइड नोट लिखा था।
मृत डॉ. रामस्वरूप चौधरी ने मरने से पहले यही सुसाइड नोट लिखा था।

सुसाइड नोट में कोरोना से मेमोरी-स्लिपिंग लॉस लिखा

मरने से पहले डॉ. रामस्वरूप चौधरी ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था। इसमें लिखा है- “कोरोना होने के बाद से यादश्त कम हो जाने, नींद नहीं आने एवं पागलपन जैसा महसूस होने के कारण कार्य में कमी आ गई थी। प्रगति में बाधा होने के कारण मैं अपनी जान दे रहा हूं। इसमें मेरे परिवार या किसी अन्य का दोष नहीं है।” पुलिस कह रही है कि घरवालों से जानकारी ली जा रही है, वैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा।

सिविल सर्जन ने कहा- काम का कोई प्रेशर नहीं था

सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अचानक गिद्धौर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की मौत की खबर सुनकर दंग रह गया। सोमवार को उनसे मुलाकात भी हुई थी। उस समय तो वह ठीक थे। काम को लेकर किसी तरह का कोई प्रेशर नहीं था।

सुनते ही चकाई के चिकित्सा प्रभारी को हार्ट अटैक

सिविल सर्जन भले ही प्रेशर नहीं समझ सके हों, लेकिन इसी घटना की जानकारी मिलने पर चकाई रेफरल अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश प्रसाद को हार्ट अटैक आ गया। पूछताछ में जानकारी सामने आई कि डॉ. रामस्वरूप चौधरी के साथ ही डॉ. रमेश प्रसाद लंबे समय से जमुई में ही पदस्थापित हैं और अक्सर जिला मुख्यालय और राज्य मुख्यालय की बैठकों में दोनों की मुलाकात होती रहती थी। डॉ. रमेश का उपचार करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया।

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