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खेतीबाड़ी:मूंगफली की सघन प्रदर्शन से होगा किसानों को लाभ:निदेशक

जमुई14 दिन पहले
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  • नदी किनारे के खाली खेतों में मूंगफली की खेती कर किसान ले सकते हैं उत्पादन का लाभ

पहाड़ एवं जंगलों से घिरे जमुई जिले में छोटी-छोटी पहाड़ी नदियों के आसपास किसानों के बलुई खेत है। ऐसे किसान रबी के मौसम में कुछ खेतों में एक फसली खेती के रूप में गेहूं उगाते हैं। जबकि बहुतायत मात्रा में ऐसे खेत खाली रहते हैं और किसानों को इन खेतों से उत्पादन का लाभ न के बराबर मिलता है। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एके ठाकुर ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले के ऐसे किसानों के लिए खेती को लाभप्रद बनाने के उद्देश्य से खरीफ के मौसम में मूंगफली की खेती के प्रदर्शन का जिम्मा उठाया है। वर्ष 2013 में विकसित की गई मूंगफली की उन्नतशील प्रजाति धरनी के प्रदर्शन का कार्यक्रम केंद्र द्वारा चलाया जा रहा है। साथ ही किसानों को मूंगफली की खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं। केंद्र प्रमुख डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि बलूहट भूमि में मूंगफली की खेती फायदेमंद होगी। जमुई जिला के बरहट, गिद्धौर, झाझा एवं खैरा प्रखंड के बलुआही भूमि वाले किसानों के बीच इस वर्ष का यह सघन दलहन प्रदर्शन कार्यक्रम किसानों के लिए काफी लाभप्रद साबित होगा ।

किसान 25 जुलाई तक कर लें मूंगफली की बुआई
इसकी बुवाई 25 जुलाई तक कर लेनी चाहिए। कम फैलने वाली किस्मों के लिए बीज की मात्रा 75 से 80 किलोग्राम और ज्यादा फैलने वाली किस्मों के लिए बीज की मात्रा 60 से 70 किलो प्रति हेक्टेयर मात्र का ही उपयोग किया जाना चाहिए। बोने से दो-तीन दिन पहले बीज को फलियों से अलग कर लेना चाहिए। बीज बुवाई से पूर्व बीज का उपचार 2 ग्राम कारबेनडाजिम प्रति किलो बीज की दर से किया जाना आवश्यक है। अगर खेत में दीमक का प्रकोप हो तो इससे बचाव के लिए क्लोरोपाइरीफ़ास 20 इसी का 12.5 मिली लीटर प्रति किलो बीज का उपचार बुवाई पूर्व कर लेना लाभप्रद होता है। इससे मूंगफली की फसल में दीमक नियंत्रित हो जाता है। इसके लिए कतार से कतार की दूरी 30-45 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखनी चाहिए। मूंगफली की खेती में नाइट्रोजन की बहुत आवश्यकता नहीं पड़ती है फिर भी हल्की मिट्टी में शुरुआत की बढ़वार के लिए 15 से 20 किलोग्राम नाइट्रोजन तथा 50 से 60 किलो फास्फोरस प्रति हे. की दर से देना लाभप्रद होता है। गोबर की खाद की उपलब्धता के अनुसार उपयोग करें। बुवाई से पूर्व 5 से 10 टन प्रति हे. गोबर का खाद खेत में बिखेर कर अंतिम जुताई से पूर्व मिट्टी में 250 किलो जिप्सम प्रति हेक्टेयर के दर से उपयोग करने से लाभ अधिक क्या होता है।

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