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खाकी के दो रंग:इधर, सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर व्रतियों से बल प्रयोग उधर, जनसभा में भीड़ की रखवाली करती रही पुलिस

जमुई / सिकंदराएक दिन पहले
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रविवार को मां नेतुला मंदिर से सटे सभा भवन में ठहरी महिला श्रद्धालुअों पर दबाव देकर हटाती पुलिस।
  • नवरात्र पर मां नेतुला मंदिर में कई राज्यों के श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर आते हैं दंड देने

काेविड-19 के नाम पर जिला प्रशासन का दो चेहरा। एक विधानसभा चुनाव और दूसरा दुर्गा पूजा को लेकर। माननीयों की सभा में पुलिस प्रशासन साेशल डिस्टेंसिंग ताेड़ रही भीड़ काे संरक्षण देते दिखी ताे वहीं दूसरी अाेर माता के दरबार में हाजिरी लगाने अाई महिला व्रतियाें के साथ साेशल डिस्टेंसिंग के नाम पर हनक दिखाती दिखी। मुख्यालय स्थित श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम मैदान में तेजस्वी यादव की सभा में पुलिस माननीय को सुरक्षा प्रदान करने में लगी थी। जबकि वहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का गला घाेंट दिया गया। दूसरी अाेर सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव स्थित प्रसिद्ध मां नेतुला मंदिर के बाहरी परिसर में दूसरे दिन भी विभिन्न प्रदेशों से आई महिला श्रद्धालुओं के साथ पुलिस की नोकझाेंक होती रही। प्रशासन और पुलिस के रवैए से नाराज कुछ महिलाएं माता के सामने पुलिस प्रशासन को कोसते हुए घर लौट गईं। मंदिर से सटे धर्मशाला, स्कूल व सार्वजनिक स्थल से महिला श्रद्धालुओं को जबरन पुलिस पदाधिकारी बाहर निकाले। लेकिन धनबाद, रांची, टाटा के अलावा दिल्ली व अन्य शहरों से आईं महिलाओं ने मंदिर के सामने पेड़ के नीचे पूरी रात बिताईं। इन महिला श्रद्धालुओं ने दो टूक कहा कि मंदिर का मुख्य द्वार खुले अथवा न खुले, वे नौ दिनों तक माता के दरबार में कष्टी के रूप में दंडवत देंगी। प्रशासन को जो भी बल प्रयोग करना है वे कर लें। इसके बाद भी जब प्रशासन का रवैया नहीं बदला तो कुछ स्थानीय लोगों के साथ महिला श्रद्धालुओं ने नवादा-सिकंदरा मुख्य मार्ग को कुमार मोड़ के समीप एक घंटे तक जाम कर दिया। इस दौरान सीओ द्वारा सार्वजनिक स्थल का उपयोग न करने की हिदायत दी। व्रतियों से कहा कि निजी स्थल में रहकर पूजा-पाठ करने से प्रशासन उन्हें परेशान नहीं है। वहीं व्रति नौ दिन यहीं रहकर व्रत पूरा करने का संकल्प लेकर आए हैं।

घर लाैट गए तो टूटेगी मन्नत, होगी परेशानी
व्रतियाें ने कहा कि एक बार व्रत करने से चूक जाती हैं तो उन्हें फिर से प्रथम व्रत के साथ मन्नतें पूरी होने तक दरबार में दंडवत लगानी होगी। ऐसा नहीं करते तो उनका व्रत पूरा नहीं होगा। इस विवशता के आगे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के बीच परेशानी खड़ी हो गई है। आखिर वह करें तो क्या करें। साथ ही पुलिस प्रशासन की ओर से प्रतिबंध लगाना परेशानी का सबब बन गया है। कष्टी देने पहुंची पकरीबरावां (नवादा) की सुशीला देवी, ममता देवी एवं दिल्ली से आई आशा देवी ने कहा कि लगातार पिछले 10 सालों से मन्नतें पूरी होने तक मां के समक्ष कष्टी दे रही हूं। अंतिम साल बचा है दंडवत लगाने का। अगर इस बार दंडवत लगाने से चूक गई तो मुझे फिर से पहले साल की तरह व्रत व दंडवत की शुरुआत करनी होगी। दिल्ली से आई मालती राय, शेखपुरा की ऊषा देवी, मोनिका कुमारी, धनबाद की प्रतिमा देवी, वारसलीगंज की हीरा देवी, विद्या देवी आदि महिलाओं ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि कष्टी दे रही महिला के घर में अकारण किसी की मौत भी हो जाती है तो उन्हें कष्टी के साथ व्रत को पूरा करना उनकी जवाबदेही बन जाती है।

निजी स्थल पर रहने से आपत्ति नहीं
मंदिर परिसर और धर्मशाला सहित सभी सार्वजनिक स्थल पर श्रद्धालुओं के रहने पर मनाही है। वे यदि किसी निजी जमीन या स्थल पर रहेंगे तो उन्हें आपत्ति नहीं है। सोशल डिस्टेंस के उल्लंघन पर वरीय पदाधिकारी जवाब देंगे।-कृष्ण कुमार सौरभ, सीओ

प्रशासन केे मौखिक आदेश से बंद
मां नेतुला मंदिर का मुख्य द्वार बंद रखने का निर्देश शांति समिति की बैठक में पदाधिकारियों द्वारा दी गई। हालांकि इसकी कोई लिखित सूचना अबतक मंदिर कमेटी को नहीं मिली है। -हरदेव सिंह, कमेटी अध्यक्ष

उधर, रविवार को ही जमुई में आयोजित पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी की सभा में भीड़ से माननीय को सुरक्षा देती पुलिस।
उधर, रविवार को ही जमुई में आयोजित पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी की सभा में भीड़ से माननीय को सुरक्षा देती पुलिस।

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