साइड इफेक्ट:124 दिन बाद खुले हाईस्कूल, 50% की जगह पहले दिन 12 % बच्चे हुए उपस्थित

जमुई/ झाझा/ सोनो/ गिद्धौर2 महीने पहले
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झाझा के एमजीएस हाईस्कूल में उपस्थित छात्र-छात्राएं। - Dainik Bhaskar
झाझा के एमजीएस हाईस्कूल में उपस्थित छात्र-छात्राएं।
  • जिलेभर के स्कूलों में लौटी रौनक, कोरोना को लेकर अभिभावक अब भी सशंकित
  • कई स्कूलों में मास्क पहनकर तो कई में बिना मास्क के ही पहुंचे विद्यार्थी और शिक्षक

कोरोना की दूसरी लहर के कारण 124 दिन से बंद स्कूलों को खोलने की सरकार ने इजाजत दी। 9वीं व 10वीं की कक्षा शनिवार से संचालित हुई तो विद्यालयों में धीरे-धीरे रौनक लौटने लगी। लंबे समय बाद स्कूलों में छात्र-छात्राओं की गूंज सुनाई दी। सरकार के आदेश के अनुसार 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ स्कूल का संचालन करना है। शनिवार से स्कूल तो खुले, लेकिन पहले दिन लगभग 10 से 12 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल आए। पहले दिन छात्र-छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिंग कर ही विद्यालय में प्रवेश कराया गया। बच्चे मास्क लगाकर कक्षा में बैठे। राज्य सरकार का विद्यालय खोलने का निर्देश आते ही सभी विद्यालयों को एक दिन पहले ही सैनिटाईज कर दिया गया था। स्कूल परिसर की भी साफ-सफाई कराई गई थी। जिले के सभी 174 हाई स्कूलों में पढ़ाई का कार्य शुरू हुआ। पांच माह बाद शनिवार को स्कूल पहुंचे छात्र-छात्रा उत्साहित दिखे।

झाझा के एमजीएस विद्यालय में पहुंचे 30 बच्चे
झाझा में विद्यार्थियों को कोविड 19 का पालन कराते हुए विद्यालय प्रशासन की ओर से सेनिटाइज करवाया गया। वहीं विद्यार्थियों के बीच सोशल डिस्टेंस का पालन करवाया गया। एमजीएस हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक निवास कुमार ने बताया कि पहले दिन विद्यालय में 25 से 30 बच्चों की उपस्थिति हुई। जबकि विद्यालय पहुंचे छात्र रमेश कुमार, अरबिंद कुमार, शिवम कुमार ने बताया कि लाॅकडाउन के कारण बीते साल से ही हमलोगों की पढाई बाधित हो रही है। जिसके कारण हमलोगों का कोर्स सही ढंग से पूरा नहीं हो पाया। वहीं अब विद्यालय खुल जाने से हमलोगों के चेहरे पर एक उम्मीद जगी है कि हमलोग विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर अपना कोर्स पूरा कर लेंगे। वहीं पहले दिन शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कोविड-19 के नियमों के पालन की भी जानकारी दी।

पहले दिन स्कूल में कम बच्चे हुए उपस्थित
इधर, गिद्धौर प्रखंड में प्राप्त निर्देश के आलोक में मास्क सेनेटाइजर की व्यवस्था सहित सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 50 प्रतिशत छात्र छात्राओं की उपस्थिति के साथ कक्षा का संचालन किया गया। जिसके तहत शनिवार से क्षेत्र के तमाम हाईस्कूलों में विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रभारी प्रधानाध्यापक की देखरेख में 9वीं 10 वीं के छात्र-छात्राओं की निर्धारित उपस्थिति के साथ कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। वहीं, स्कूल में विधि व्यवस्था की जानकारी देते हुए महाराजा चंद्रचूड़ विद्या मंदिर के प्रधानाध्यापक मो. मंजूर आलम एवं उच्च विद्यालय धोबघट के प्रधानाध्यापक कामता प्रसाद ने बताया कि महामारी से जुड़े विभागीय एवं स्वास्थ्य दिशा निर्देश को ध्यान में रखकर कक्षा का संचालन किया जा रहा है।

स्कूल जाने के लिए छात्रों में दिखा विशेष उत्साह

इधर, सोनो प्रखंड में कक्षा दस में पढ़ने वाली आरती कुमारी की आंखें शनिवार सबेरे जल्दी खुल गई थी। वजह थी लंबे समय बाद स्कूल खोले जाने और वहां जाकर पढ़ाई करने का मौका मिलने का। जवाहर उिव डुमरी राजपुर की छात्रा शिवानी कुमारी बताती हैं कि कोरोना के विषम हालात में उसने ऑनलाइन पढ़ाई की है पर स्कूल आकर पढ़ाई करने से विद्यार्थियों को विषय को समझने में इसलिए आसानी होती है क्योंकि उनकी जिज्ञासा को शिक्षक फौरन शांत कर सकते हैं। वहीं केवाली की नौवीं की छात्रा ज्योति कुमारी खुश होकर कहती है कि स्कूल खुलने से वह उत्साह से लबरेज है। आकांक्षा कुमारी बताती हैं कि कई बार घर में रहकर पढ़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन 10वीं बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर यह सुविधाजनक हो गया है कि स्कूल आज से खुल गए हैं। हालांकि हमें एहतियात बरतना होगा और सरकार द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूल आना होगा। बीते 12 जुलाई से 11वीं और 12वीं कक्षा का संचालन हो रहा है। जारी निर्देश के अनुसार 16 अगस्त से पहली से आठवीं तक की कक्षा का संचालन होगा।

बच्चों की पढ़ाई की चिंता पर कोरोना संक्रमण का डर
विद्यालय खुलने के बाद अभिभावकों ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। किसी ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार किया तो किसी ने कोविड गाइडलाइन के तहत स्कूल खोले जाने का समर्थन किया है। कोरोना संक्रमण के कारण बीते अप्रैल से या यूं कहें बीते साल से बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हुई है। इसे लेकर अभिभावकों ने चिंता जाहिर की है। अभिभावक मनोज सिंह का कहना है कि बच्चों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती लेकिन इस तरह घर पर रहने से बच्चों की पढ़ाई भी संकट में है।

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