मां कालिका मंदिर में वार्षिकोत्सव पूजा शुरू:जमूई के मशहूर मां कालिका मंदिर में महाशत चंडी यज्ञ, मंदिर को आकर्षक बल्बों से सजाया गया

जमूईएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मां कालीका मंदिर को सजाया गया। - Dainik Bhaskar
मां कालीका मंदिर को सजाया गया।

जमूई जिले के प्रसिद्ध मां कालीका मंदिर मलयपुर में विगत 25 अक्टूबर से चल रहे महाशतचंडी यज्ञ का बुधवार देर शाम को कन्या भोजन के साथ समापन हो गया। मंदिर को दूधिया रोशनी से सजाया गया। मंदिर परिसर में की गई लाइटिंग देखने लायक है। जहां एक तरफ मंदिर परिसर में आकर्षण फूल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। वहीं मां कालिका मंदिर में चल रहे महा शतचंडी यज्ञ का समापन बुधवार के साथ पूजा विधि के साथ समाप्त हो गया।

बुधवार की मध्यरात्रि से मां काली मंदिर मंदिर में वार्षिकोत्सव पूजा आरंभ हो गया है। दिल्ली हावड़ा मैन लाइन जमूई रेलवे स्टेशन स्थित मलयपुर गांव स्थित मां काली का मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। ट्रेन यात्रियों की निगाहें जब अचानक मंदिर की ओर जाती है तो उनकी आंखें श्रद्धापूर्वक मां से आशीर्वाद लेने के लिए झुक जाती है। मां काली का मंदिर के पूजा अर्चना और दर्शन करने के लिए जिले से ही नहीं अलग-अलग कई जिलों के लोग आते हैं और श्रद्धा पूर्वक पूजा कर अपने मान्यता पूरी करते हैं। मां कालिका मंदिर की खूबसूरती और किए गए लाइटिंग जो हर दिन चेंज होती है वह देखने लायक होती है

इधर, मां कालिका मंदिर के सचिव प्रशुन कुमार सिंह ने बताया कि 25 अक्टूबर से चल रहे हैं महा चंडीयज्ञ का समापन हो गया है और वार्षिक पूजा आरंभ हो गई है। उन्होंने बताया कि सोनो डुमरी के पंडित शिव प्रसाद पांडे की अगुवाई में 17 पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर के साथ कराया गया। उन्होंने यज्ञ के उद्देश्यों के बारे में बताएं कि यज्ञ के आयोजन से आमजनों में कोरोना जैसी महामारी से मुक्ति दिलाना है। मां कालिका मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।

बताया जाता है कि लागातार1996से आयोजन किया जा रहा है। पहले तो मेले का भव्य आयोजन होता था।इस बार कोरोना काल को देखते हुए मंदिर प्रबंधकों के द्वारा मेले को स्थगित कर दिया गया। श्रद्धालुओं सिर्फ भक्ति भाव से पूजा अर्चना कर सकते हैं और पूजा करने के लिएआने बाले श्रद्धालुओं को मास्क होना अनिवार्य है।

खबरें और भी हैं...