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अव्यवस्था:जमुई के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में क्रिटिकल बच्चों के इलाज की सुविधा नहीं

जमुई7 दिन पहले
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एसएनसीयू में खराब पड़ी रेडियंट वार्मर मशीन। - Dainik Bhaskar
एसएनसीयू में खराब पड़ी रेडियंट वार्मर मशीन।
  • पड़ोसी जिला मुंगेर में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों में संक्रमण का मामला सामने आया, लेकिन...
  • चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड में न आईसीयू और न ही वेटिंलेटर, रेफर ही रास्ता

कोरोना की दूसरी लहर अब थमती जा रही है,संक्रमितों की संख्या हर दिन घट रही है तो तीसरी लहर से बच्चों को बचाने का डर भी लोगों को सताने लगा है। हालांकि स्वास्थ विभाग की टीम कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं और उससे निपटने को लेकर तैयारी में जुटी है। सदर अस्पताल में चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है। बावजूद स्वास्थ विभाग की तैयारी मुकम्मल नहीं कहा जा सकती। विभाग अपने पुराने ढर्रे पर ही काम कर रही है। पड़ोसी जिले मुंगेर में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों में संक्रमण फैलने का मामला सामने आया है। इससे इतर जमुई में स्वास्थ विभाग सरकारी जुमला की रट लगा रही है कि बच्चों में संक्रमण का मामला नहीं आया है और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यालय में सरकारी अथवा प्राइवेट अस्पतालों में क्रिटिकल बच्चों के इलाज की सुविधा नहीं है। सदर अस्पताल में बन रहे चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड में न तो आईसीयू और न ही वेटिंलेटर की व्यवस्था की गई है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगाकर तीसरी लहर के आने पर बच्चों के इलाज का दावा किया जा रहा है। ऐसे में किसी संक्रमित बच्चे की स्थिति बिगड़ी है तो फिर स्वास्थ्य विभाग मायागंज और पटना रेफर करने के सिवा उनके पास और कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। दरअसल चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड में लाईफ सपोर्ट सिस्टम का कोई भी यंत्र नहीं लगाया गया है। सदर अस्पताल प्रबंधक रमेश पांडेय ने बताया कि फिलहाल सदर अस्पताल में 15 बेड का चाइल्ड आइेसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है। सभी बेड तक ऑक्सीजन का पाईप लाइन बिछाया गया है। साथ ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था की गई है।

एसएनसीयू के 16 में 10 रेडियंट वार्मर मशीन खराब पड़ी है
सदर अस्पताल परिसर में संचालित एसएनसीयू की हालत भी ठीक नहीं है। एसएनसीयू में लगे 16 रेडियंट वार्मर में 10 खराब पड़े हैं। छह मशीन ही चालू अवस्था में है। अन्य डिवाईस में बच्चों के लिए कंसंट्रेटर की स्थिति भी चालू अवस्था में नहीं है। भास्कर ने एसएनसीयू की पड़ताल की तो पता चला कि एसएनसीयू में एक भी नवजात बच्चा भर्ती नहीं था। एसएनसीयू में प्रतिनियुक्त डॉक्टर संजय गुप्ता भी मौजूद नहीं थे। चतुर्थवर्गीय कर्मचारी किशोर कुमार ने बताया कि दस रेडियंट वार्मर मशीन तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है।

तीसरी लहर के आने से पहले अधिक सचेत रहने की जरूरत

कोरोना की दूसरी लहर ने खासकर युवाओं को ज्यादा संक्रमित किया। जिले में कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों में युवाओं की संख्या अधिक है। ऐसे में तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा खतरा होने की आशंका जताई जा रही है। लिहाजा तीसरी लहर के आने से पहले लोगों को अधिक सचेत रहने की जरूरत है। भास्कर का मकसद लोगों को डराना नहीं बल्कि आने वाले खतरे से सतर्क करना है। अस्पताल प्रबंधक ने बताया कि तीन दिनों में चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड बनकर तैयार हो जाएगा।

विभाग सतर्क
तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा प्रभावित होने की संभावना का कोई वैज्ञानिक कारण नहीं बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग सतर्क और तैयार है। 15 बेड का चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। एसएनसीयू के खराब मशीनों को भी ठीक कराया जाएगा।
डाॅ. विनय शर्मा, सीएस

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