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परेशानी:कुपोषित बच्चों के लिए बना पोषण पुनर्वास केंद्र तीन महीने से बंद डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति नहीं होने से पुनर्वास केंद्र खोलने में परेशानी

जमुई2 महीने पहले
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सदर अस्पताल में बंद पोषण पुनर्वास केंद्र। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में बंद पोषण पुनर्वास केंद्र।
  • 2011 से लेकर 2019 के सितंबर तक अलहलाल एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से पोषण पुनर्वास केंद्र का हुआ संचालन
  • नीति आयोग ने नए प्रोजेक्ट को दी स्वीकृति, सामुदायिक स्तर पर कुपोषित बच्चों की होगी समुचित देखभाल

सूबे से कुपोषण का कलंक मिटाने में अबतक किए गए मानकीकृत प्रयास का कुछ खास परिणाम सामने नहीं आया है। लिहाजा कुपोषण से जंग में सबके साथ के बिना जीत बहुत मुश्किल दिख रही है। अहम बात यह है कि जिले में कुपोषित बच्चों के समुचित देखभाल के लिए बना पोषण पुनर्वास केंद्र पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। बताया जाता है कि वर्ष 2011 से लेकर 2019 के सितंबर महीने तक मुजफ्फरपुर की संस्था अलहलाल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन किया गया। लेकिन अब सरकार ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा केंद्र का संचालन करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत जिला स्वास्थ्य समिति को यह जिम्मेवारी सौंपी गई है कि कुपोषण से जंग को लेकर केंद्र का संचालन और बच्चों का समुचित देखभाल की जाए। सरकार का यह निर्णय पिछले तीन महीने से फाइलों में धुल फांक रहा है। 20 बेड के पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों को मां के साथ 15 दिनों तक उपचार के लिए रखा जाता था। यानि हर महीने 40 कुपोषित बच्चों का उपचार होता था। आंकड़े पर गौर करें तो पूरे साल में 4800 बच्चों को इस सुविधा का लाभ मिल रहा था, जिससे अब वे वंचित हो गए हैं।

तीन एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण
जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि मेन पावर को बहाल किया जाएगा। तीन एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया है, उनके द्वारा पुनर्वास केंद्र संचालित करने की तैयारी चल रही है।

जिले में कुपोषण का ग्राफ 2% सुधरा अब भी 38% कुपोषित
पिछले तीन वर्षों में जिले में कुपोषण का ग्राफ 2 फीसद कम हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 3 लाख 52 हजार बच्चे (0-5) हैं। जिनमें 40 फीसद बच्चे कुपोषित हैं। हालांकि वर्तमान में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत पहुंच गया है। हालांकि जिले में बच्चियों के अति कुपोषित होने का आंकडा अब भी चिंताजनक बना है। जिले में 60 फीसद बच्चियां कुपोषण का शिकार है। वार्षिक हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 0 से 6 वर्ष आयु की 60 फीसद बच्चियों में रक्त अल्पता है।

नए प्रोजेक्ट पर मार्च महीने तक काम हो जाएगा शुरू
जिला स्तर पर नीति आयोग को भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। जिसमें सामुदायिक स्तर पर कुपोषित बच्चों की पहचान, उनकी देखभाल सहित उपचार मुहैया कराना है। इस नए प्रोजेक्ट में सभी प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्रों में कुपोषित बच्चों के लिए पांच बेड की व्यवस्था होगी। संभावना जताई जा रही है कि मार्च तक इस नए प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ हो जाएगा।

इस महीने शुरू हो जाएगा पोषण पुनर्वास केंद्र
मैन पावर की नियुक्ति के साथ ही इस महीने पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन शुरू हो जाएगा। सदर अस्पताल के चिकित्सक की निगरानी में बच्चों को समुचित उपचार का लाभ मिलेगा। केंद्र के संचालन की तैयारी की जा रही है।
-सुधांशु नारायण लाल, डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति जमुई

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