चेहल्लुम पर्व:मुख्यालय में चेहल्लुम पर पसरा रहा सन्नाटा लोगों ने घरों में मातम और दुआख्वानी की

जमुई2 महीने पहले
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  • मुहर्रम के चालीसवें दिन मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाता है चेहल्लुम

मोहर्रम के 40वें दिन चेहल्लुम पर्व मंगलवार को कई प्रखंडों में मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्र में मुस्लिम भाइयों ने कई जगह सादगी के साथ चेहल्लुम पर्व मनाया। इस दौरान घरों में ही मातम व दुआख्वानी की गई। खैरा प्रखंड के चौकीटांड व भीमाइन में शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया। शाम को ताजिएदारों ने कर्बला में मिट्टी दफन किया। हालांकि इस बार भी चेहल्लुम पर न तो ताजिया निकाली गई और न ही किसी तरह का सार्वजनिक आयोजन हुआ। समुदाय के लोगों ने अपने-अपने घरों में ही चेहल्लुम पर मजलिस और मातम किया। शाम को कर्बला में मिट्टी दफन की गई।
कोविड-19 गाइडलाइन का किया गया पालन
पंचायत चुनाव को देखते हुए एवं कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने सख्त ताकीद की थी कि पर्व को शांति पूर्वक मनाया जाए। न तो काेई जुलूस निकाला जाएगा। न ही डीजे वगैरह बजाया जाए। मुसलमान भाइयों ने इसका पालन करते हुए अपने-अपने घरों पर ही शहीद इमाम हुसैन को याद किया ओर ताजिये को सुपुर्दे खाक करने की रस्म अदायगी की। बता दें कि इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम के दस तारीख को करबला की जंग में नवासा ए रसूल इमाम हुसैन शहीद हुए थे। फातिमा के लाल की खता ये थी कि उन्होंने जालिमों के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने जुल्म के आगे सिर कटाना मुनासिब समझा। उनकी शहादत के चालीस दिन पूरे होने पर शिया के द्वारा ही चेहल्लुम मनाया जाता है, लेकिन जमुई में कई जगह शिया व सुन्नी मिलकर चेहल्लुम मनाते हैं।

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