त्योहार:भाई को तिलक लगा सुख-समृद्धि की कामना की

कटिहारएक महीने पहले
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जगन्नाथपुरी में ललिता निवास के प्रांगण में भाई दूज का पर्व मनाते हुए महिलाएं। - Dainik Bhaskar
जगन्नाथपुरी में ललिता निवास के प्रांगण में भाई दूज का पर्व मनाते हुए महिलाएं।
  • जिले भर में धूमधाम से संपन्न हुआ भाई बहन के स्नेह का पर्व भैयादूज, बहनों ने की पूजा-अर्चना

शनिवार को जिले व आसपास के इलाके में भाई-बहन के स्नेह प्यार का प्रतीक पर्व भाईदूज धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाई के माथे पर तिलक लगा एवं पान, सुपारी, करमी के लत से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। दीपावली के 2 दिन बाद कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाईदूज का त्यौहार पांच दिवसीय दीपावली पर्व कि श्रृंखला का अंतिम पर्व है। यह त्यौहार भाई बहनों के बीच प्रेम और स्नेह भाव को बढ़ाता है। बहनों ने रखी व्रत : भैया दूज के अवसर पर बहनों ने भाई की लंबी आयु और उनके स्वास्थ्य की मंगल कामना को लेकर व्रत रखी। बहन के घर पर भाई को भोजन भी कराया गया। जानकार बताते हैं कि यदि अपनी सगी बहन ना भी हो तो किसी भी बहन के साथ इस परंपरा का निर्वहन कर सकते हैं। शनिवार को इस पर्व के मौके पर घरों में मंगल गीत भी गाए गए। इससे पूर्व घर की महिलाओं ने अरवा चावल को पीसकर आम की लकड़ी के पीड़ा, घी के दीपक आदि के साथ रंगोली भी बनाई। जिस पर भाई को विराजमान कर यम यमुना के नाम से गाए जाने वाले गीत के साथ पूजा की गई। पैर धोकर चंदन टीका लगाकर भाई का स्वागत किया गया। फिर उन्हें उनके मनपसंद का भोजन कराया गया। बाद में मिष्ठान का भोग लगाकर प्रसाद भी वितरण किया गया।

बहन के हाथ से पकाया भोजन करने से पुष्ट होता है शरीर
डंडखोरा प्रखंड क्षेत्र में भैया दूज की धूम रही। बहनों ने अपने भाइयों के पसंद का भोजन बनाकर खाने का निमंत्रण देकर खिलाया। भाई भी दूर-दूर से बहनों के लिए सामर्थ के अनुसार मिठाई, वस्त्र आदि उपहार लेकर अपने बहन के घर आए। बहनों ने पैर धोकर चंदन टीका लगाकर भाइयों को आदर पूर्वक भोजन करवाया। इसको लेकर प्रचलित धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जो भाई-बहन के हाथ का पकाया भोजन करते हैं उनका शरीर पुष्ट होता है और निरोग रहता है। शास्त्रों में इसे यम और यमुना की कथा बताया गया है। त्यौहार को लेकर पूरे क्षेत्र में भाई बहनों का उत्साह चरम पर देखा गया।

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