आस्था:चित्रगुप्त पूजा आज, चित्रांशों के घरों के साथ मंदिरों में होगी सार्वजनिक पूजा

कटिहार22 दिन पहले
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  • कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति स्थापित कर करते हैं पूजा

शहर के हाई स्कूल पाड़ा स्थित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर में पूजा की तैयारी पूरी कर ली गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मंदिर में वर्षों से पूजा का आयोजन हो रहा है। यहां दूर-दूर से लोग पूजा करने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि कायस्थ बंधु कार्तिक महीने की दिव्या को कलम दवात के देवता भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना करते हैं। भगवान संसार के सभी चीजों का लेखा जोखा रखते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कलम से काम करने वाले सभी लोगों को इस भगवान की पूजा करनी चाहिए। कहा जाता है कि सभी कायस्थ बंधु चित्रगुप्त भगवान के वंशज हैं और इस दिन कलम नहीं छूते हैं। कार्तिक शुक्ला द्वितीय तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है। इस दिन चित्रांश समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त और यमराज की मूर्ति स्थापित कर अथवा उनकी तस्वीर देखकर श्रद्धा पूर्वक पूजा करते हैं। फिर जाने अनजाने में हुए अपराधों के लिए उनके क्षमा याचना की जाती है। पंडित ललन झा के अनुसार भगवान चित्रगुप्त परमपिता ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न हुए हैं और जीवात्मा द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार उन्हें फल देने में यमराज के सहयोगी हैं। क्योंकि इनका जन्म ब्रह्मा जी के काया से हुआ था। यह कायस्थ कहलाए और उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा। चित्रांश के लिए पूज्य देव है।

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