खेती-बाड़ी:वैशाली के 40 किसानों काे ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रशिक्षण

कटिहार2 महीने पहले
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प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते कटिहार के वैज्ञानिक। - Dainik Bhaskar
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते कटिहार के वैज्ञानिक।
  • कटिहार में 5 दिनों तक चलेगा प्रशिक्षण, खेती की बारीकियों की दी जाएगी जानकारी

लैटिन अमेरिकी फल ड्रैगन फ्रूट की खेती का गुर सीखने आए वैशाली के 40 किसानों का प्रशिक्षण मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र कटिहार में शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ रीता सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। आत्मा वैशाली द्वारा वैशाली जिले के विभिन्न प्रखंडों से किसानों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण के लिए कटिहार भेजा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वैशाली जिले में भी ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देना है। इस दौरान डॉ रीता सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किसानों को इसकी खेती की जानकारी दी और कहा कि ड्रैगन फ्रूट्स में कैल्शियम एवं एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसका रेगुलर सेवन करने से लोग बहुत सारी बीमारी से बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के सेवन से डायबिटीज, हार्ट संबंधी बीमारियां, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल, पाचन तंत्र दुरुस्त करता है। साथ ही यह हमारे इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाता है। एक बार पौधा लगने के बाद 25 वर्षों तक मिलेगा फल : प्रधान वैज्ञानिक डॉ रीता सिंह ने कहा कि परंपरागत खेती जैसे गेहूं, धान, मक्का की तुलना में ड्रैगन फ्रूट की खेती अधिक आमदनी देने वाला और रोजगार का अच्छा स्रोत है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए हाल के दिनों में इसकी खेती का प्रचलन बढ़ा है। यह कम वर्षा वाला क्षेत्र में इसकी खेती उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि बिहार के किशनगंज जिले में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। जबकि कटिहार के एक दर्जन किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को अपना रोजगार का जरिया बनाया है। उन्होंने कहा कि ड्रैगन फ्रूट का पौधा एक बार लगा देने से 20 से 25 वर्ष तक फल तोड़ा जा सकता है। यह पौधा बिल्कुल रोगमुक्त है।

खेती के सभी पहलुओं की दी जाएगी जानकारी
वैशाली से आए किसानों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा ड्रैगन फ्रूट की खेती के सभी पहलुओं जैसे शस्य क्रियाएं, पौधे की स्थापना, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई व जल प्रबंधन, औषधीय महत्व, पौधशाला की तैयारी एवं देखरेख सहित आय-व्यय व विपणन आदि विषयों पर जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ केपी सिंह, स्वीटी कुमारी, प्रियंका कुमारी, ओम प्रकाश भारती, राजू कुमार, मुकेश कुमार एवं विकास कुमार सहित किसान मौजूद रहे।

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