आक्रोश / श्रम कानूनों में परिवर्तन कर देश में निजीकरण के दौर की शुरुआत करना चिंतनीय: मनोज सिंह

It is worrisome to start the phase of privatization in the country by changing labor laws: Manoj Singh
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It is worrisome to start the phase of privatization in the country by changing labor laws: Manoj Singh

  • केंद्रीय श्रम संगठनों और कर्मचारियों ने काला-बिल्ला लगाकर किया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन
  • बोले-प्रदर्शन के बाद भी सकारात्मक परिणाम नहीं आया तो आगे उग्र आंदोलन होगा

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:18 AM IST

कटिहार. विभिन्न राज्यों में श्रम कानूनों में बदलावों के खिलाफ लगभग सभी केंद्रीय श्रम संगठनों और कर्मचारियों ने राष्ट्रीय महासंघों के संयुक्त मंच से शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया। कटिहार रेल मंडल के रेलवे मजदूर यूनियन एवं इंप्लाइज यूनियन शामिल रहें।

मौके पर मजदूर यूनियन के महामंत्री मनोज सिंह ने अपनी मांगों को रखते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी करते हुए श्रम कानूनों में परिवर्तन कर देश में बड़े पैमाने पर निजीकरण के दौर की शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। जो सबसे चिंतनीय है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश के हैं जहां लगभग सभी श्रम कानूनों को तीन साल के लिए निलंबित करने की कवायद की जा रही है। 

केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी  

केंद्र सरकार संसद, राज्य सरकारों, राजनीतिक दलों को विश्वास में लिए बिना अचानक मजदूर विरोधी निर्णय लिया है। 
मनोज सिंह ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को अंतर-राज्यीय सीमाओं से वापस किया जा रहा है। श्रमिकों को वापस जाने से रोकने और उन्हें कारखानों में काम करने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया की इससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार मजदूरों को पूंजी के हित में किसी भी अधिकार या गारंटी के बिना, बगैर किसी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा और सभी मानवीय गरिमाओं को दरकिनार कर केवल खास वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जिनका उद्देश्य श्रमिकों के खून और पसीने की लागत पर केवल अपने लाभ को अधिकतम करना है। जो मानव अधिकारों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

7500 नकद राशि का किया मांग 

एनएफ रेलवे इंप्लाइज यूनियन के मंडल सचिव रूपेश कुमार ने कहा कि फंसे हुए श्रमिकों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने, सभी को भोजन उपलब्ध कराने, बिना किसी शर्त के राशन वितरण और पूरे लॉकडाउन अवधि के लिए सभी को मजदूरी सुनिश्चित करने, असंगठित श्रम बल (पंजीकृत या अपंजीकृत या स्वरोजगार) सहित सभी गैर-आयकर कर दाता परिवारों को कम से कम तीन महीने यानि अप्रैल, मई और जून के लिए  7500 रुपए की राशि नकद हस्तांतरण की व्यवस्था के रूप में तत्काल राहत की मांग किया। 

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