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माह-ए- रमजान:कोरोना को नष्ट करने के लिए रखा हूं रोजा, अल्लाह हमारी सुनेंगे

कटिहारएक वर्ष पहले
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  • नन्हें रोजेदार भूखे-प्यासे कर रहे अल्लाह की इबादत, रोजा रखकर पांच वक्त की नमाज अदा की

रमजान में बड़ों के साथ छोटे बच्चे भी रोजा रखकर खुदा की इबादत में पीछे नहीं है। रोजा रखकर पांच वक्त की नमाज अदा कर खुदा की इबादत में मशगूल हैं।  सेहरी और इफ्तार भी समय पर कर रहे हैं। जिले में सैकड़ों ऐसे बच्चे हैं, जो पहली बार रोजा रख रमजान के सभी नियम का पालन कर रहे हैं। अभिभावक कहते हैं कि रहमत और बरकत का महीना माह-ए- रमजान घर के लाेगों में इबादत के लिए जुनून पैदा करता है, इसलिए बच्चे भी इबादत में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

अल्लाह के प्रति विश्वास भविष्य के लिए बेहतर
इस बार छोटे बच्चे रोजा रखकर कोरोना को दूर भगाने व देश की अमन-चैन के लिए दुआ कर रहे हैं। मदरसा गौसिया हिदायतुल उलूम के मौलाना सिकंदर रजा ने बताया कि सामान्य रूप से 7 वर्ष या उससे ऊपर के बच्चों को रोजा रखने का प्रावधान है। कम उम्र बच्चे रोजा रखते है, तो उन्हें अल्लाह की नजदीकी जल्दी मिल जाती है। बच्चों के रोजा रखने का पुण्य उनके माता-पिता को मिलता है। इस आयु में ही उनमें अल्लाह के प्रति विश्वास उनके भविष्य के लिए बेहतर है।

रीदा हूरिया कुरैशी, 8 वर्षीय रोजेदार ने बोला - सेहरी और इफ्तार से ताकत मिलती
रमजान का महीना काफी अहम होता है। हम इस महीने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। सेहरी और इफ्तार से ताकत मिलती है।

जैनब, 8 वर्षीय रोजेदार ने कहा - रोजा रखने से दिल को सुकून मिलता है
मैं पहली बार रोजा रख रहा हूं, आगे रोजा रखने से दिल को सुकून मिलता है।  

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