परंपरा:आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा सोहराय महापर्व

मनसाही7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
पारंपरिक नृत्य करते आदिवासी समुदाय के लोग। - Dainik Bhaskar
पारंपरिक नृत्य करते आदिवासी समुदाय के लोग।
  • छह दिनों से चलने वाले सगुन सकरात के साथ ही आदिवासियों का साेहराय का समापन आज

आदिवासियों भाइयों का महापर्व सोहराय जो आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है यह पर्व हर वर्ष नौ जनवरी से चौदह जनवरी तक मनाया जाता है। इस वर्ष भी मनसाही के चितोरिया पंचायत के जयनगर करमाटोला में आदिवासी समुदाय के लोग इस पर्व को कोविड नियमों का पालन करते हुए आदिवासी रीति-रिवाज के साथ धूमधाम से मना रहे है जिसका समापन आज होगा। इस पर्व के प्रथम दिन उम जिसमें सभी आदिवासी समुदाय के लोग उपवास कर वन की पूजा करते हैं जो उनके जल-जंगल की प्रति प्रेम को दर्शाता है, दूसरे दिन बोंगा बुरू दिन, तीसरा दिन खुन्नटव दिन, चौथा दिन जाली दिन, पांचवा दिन हाकु काटकोम दिन और अंतिम दिन सगुन सकरात के साथ ही यह पर्व सम्पन्न होता है। इस पर्व में आदिवासी समुदाय के लोग नए वस्त्र पहनकर पारम्परिक नृत्य की प्रस्तुति करते हैं। इस पर्व में आदिवासी समुदाय के साथ स्थानीय लोग की भी सराहनीय सहभागिता रहती है। करमाटोला में इस महापर्व के सफल आयोजन में शत्रुघ्न हासदा, मरांग मरांडी, बिजय कुमार मुर्मुर, राजेश कुमार बासकी, जेठा हसदा, मुखिया दीपनारायण पासवान, पसंस सुषमा कुमारी, समाजसेवी गौतम सिंह, पंच प्रदीप सिंह, जनार्धन सिंह आदि की सराहनीय भूमिका रही है।

खबरें और भी हैं...