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दुर्गे देवी नमस्तुभ्यं:सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके मंत्रोच्चारण के बीच मां शैलपुत्री की हुई पूजा, माता के मंदिर से लेकर घरों तक दुर्गा सप्तशती का हुआ पाठ

कटिहार19 दिन पहले
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बड़ी दुर्गा मंदिर में विराजमान मां की भव्य प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
बड़ी दुर्गा मंदिर में विराजमान मां की भव्य प्रतिमा।
  • माता के मंदिराें और पूजा पंडालाें में की गई कलश की स्थापना, प्रथम स्वरूप शैल पुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि अनुष्ठान प्रारंभ

कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए शारदीय नवरात्र के पहले दिन गुरुवार को जिले भर में भक्ति भाव से कलश स्थापना की गई। जिसके बाद शहर व आसपास के इलाकों में भक्तिपूर्ण माहौल में पूजा अर्चना शुरू हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने घरों के अलावा मंदिरों में भी कलश स्थापना कर मां देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप के रूप में माता शैल पुत्री की पूजा अर्चना की। इस बार अगले 8 रात एवं 9 दिनों तक पूजित होने वाली देवी दुर्गा के इस महापर्व उत्सव में चहल पहल देखी जा रही है। हालांकि कोविड गाइडलाइन को लेकर सभी मंदिरों में कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया जा रहा है। वही मंदिर कमेटियों के द्वारा लोगों को मास्क पहनकर ही मंदिर में आने की सलाह दी जा रही है। जबकि नवरात्र के प्रथम दिन शैल पुत्री की पूजा को लेकर मंदिरों में चहल-पहल रही। वहीं कई श्रद्धालु अपने घरों में ही भक्ति भाव से पूजा में लीन है।

दुर्गा के नौ रूप स्त्री जीवन चक्र के नौ बिंब है | पंडित ललन झा ने बताया कि नव दुर्गा का नौ रूप एक स्त्री के पूरे जीवन चक्र का बिंब है। जिसमें जन्म ग्रहण करती हुई कन्या शैल पुत्री का स्वरूप है। उसी प्रकार कौमार्य अवस्था तक ब्राह्मचारणी, विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से चंद्रघंटा, जीव को जन्म देने के लिए गर्भधारण करने पर कुष्मांडा, संतान को जन्म देने के बाद स्कंदमाता, संयम व साधना को धारण करने वाली कात्यायनी, संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने वाली कालरात्रि, संसार का उपकार करने वाली महागौरी तथा धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि का आशीर्वाद देने वाली सिद्धिदात्री मां का अलग अलग स्वरूप है।

फलाहार रहकर कर रहे मां की पूजा
नवरात्र में आस्था का विविध रूप देखने को मिलता है। पूरे 9 दिन कोई निराहार तो कोई फलाहार रहकर मां की पूजा करते हैं। इसके साथ ही मां की ज्योत जलाने और महा आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जबकि गुरुवार को पूजा की सामग्री खरीदने को लेकर बाजारों में चहल-पहल भी देखी गई।

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