मकर संक्रांति:सूर्य के संक्रमण के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है मकर संक्रांति

कटोरिया8 दिन पहले
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  • दही चुड़ा, गुड़, तिल, लड़ुआ खाकर लोगों ने मनाया मकर संक्राति का पर्व

कटोरिया, सूईया,भैरोगंज आस-पास में शुक्रवार को मकर संक्रांति पर्व को लोगों ने अलग अलग ढंग से मनाया। कहीं नदी तालाब में सुबह सुबह स्नान ध्यान कर दही चुड़ा, गुड़, तिल, लड़ुआ खाकर मनाया गया तो कहीं खिचड़ी का भोग लगाकर। दूसरी ओर पारंपरिक ढंग से मकर संक्रांति पर्व को मनाने का चलन भी आमजन में खास नहीं देखा गया। मकर संक्रांति के दिन होने वाले गर्मी के एहसास की शुरूआत की जगह आमजन ने ठंड का एहसास किया। सुबह से शाम तक मिनट भर भी सूर्य खिलकर सामने नहीं आए।

उत्तरायन देवताओं का दिन माना जाता है
शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्य जब पूरब और दक्षिण कोण से पूरब और उत्तर कोण की ओर करवट लेती है अर्थात सूर्य दक्षिणायन मतलब धनु राशि से उत्तरायण मतलब मकर राशि पर पहुँचते हैं। मकर संक्रांति मनाया जाता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन देवताओं का दिन माना जाता है। शास्त्र में मकर संक्रांति को सूर्य के संक्रमण के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। जिसमें कहा गया है कि एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति कहलाती है।वहीं सूर्य के राशि परिवर्तन को भी संक्रांति कहते हैं जो साल में एक बार आता है। यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपनी दिशा परिवर्तन करके मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन से ठंड का प्रभाव धीरे -धीरे कम होने लगता और मौसम में गर्मी आने लगती है।

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