राहत की खबर:एक दिन में ठीक हो रहे 150 संक्रमित

खगड़िया6 महीने पहले
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  • जिले में रोजाना 150 से ऊपर कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हो रही है, लेकिन...

खगड़िया में कोरोना योद्धाओं के दम से संक्रमित मरीजों के रिकवरी रेट में काफी तेजी आई है। अब एक तरफ जहां एक दिन में 156 नए मरीज मिल रहे हैं तो वहीं 150 से ज्यादा संक्रमित मरीज ठीक भी हो रहे हैं। इसका सारा श्रेय स्वास्थ्य विभाग के वैसे कर्मियों को जाता है जिन्होंने बीते एक माह से बगैर अपने घर का मुंह देखे अस्पताल में भर्ती मरीजों की और होम आइसाेलेशन में रहने वाले मरीजों की लगातार देखभाल की और उन्हें स्वस्थ बनाया। खगड़िया में अभी कोरोना संक्रमण फैलना कम नहीं हुआ है। रोजाना 150 के लगभग मरीज मिल रहे हैं। जिससे इनलोगों की चिंताएं बढ़ी हुई है। गुरूवार को जब दैनिक भास्कर की टीम इन कोरोना योद्धाओं से मिलने पहुंची तो इनके चेहरे पर कहीं भी मायूसी या उदासी नजर नहीं आई। इनलोगों ने एक सांस में कहा कि इसी दिन के लिए तो इस सेवा में आये थे। ड्रेस और एप्रोन पहनने के पूर्व हमलोगों ने मरीजों के नि:स्वार्थ सेवा करने का संकल्प लिया था जो अभी पूरा करने का अवसर मिल रहा है। इसलिए पीछे हटने का सवाल कहां है? फिलहाल खगड़िया में कुल 1564 एक्टिव मरीज हैं। वहीं आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट लेट मिलने के कारण कई मरीजों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि वे लोग पॉजिटिव हैं या निगेटिव। जांच देने के बाद वे बेफिक्र होकर बाजार में घूम रहे हैं। जिससे कि संक्रमण और तेजी से फैल रहा है।

क्योंकि...डेढ़ माह से घर का मुंह नहीं देखे स्वास्थ्कर्मी, रात में यहीं सोते, कोरोना पॉजिटिव भी हुए, बोले-20 साल की नौकरी में पहली बार मरीजों की सेवा करने का माैका मिला

1. ऑक्सीजन लगाने का काम करते हैं शंकर कुमार

मैंने बीते वर्ष भी कोविड वार्ड में मरीजों को दवा-सूई देने और ऑक्सीजन लगाने का काम संभाला था। 20 साल की नौकरी में पहली बार ऐसा लगा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ काम करने को मिला है। मेरे बच्चों ने बल दिया और कहा कि पिता जी अपना ख्याल रखते हुए मरीजों की सेवा कीजिए क्योंकि यहां इंसानियत बचाने की जंग चल रही है। मैं मुंगेर जिले का रहने वाला हूं। लगातार सेवा में रहने के कारण मैं बीते डेढ़ माह से घर नहीं गया था। अगर डर होता तो बीमार बन कर घर जाकर आराम करता। सेवा करने के दौरान मैं गुरुवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। अभी 14 दिनों के लिए होम आइसोलेशन में जा रहा हूं। लेकिन 15 वें दिन फिर यही आकर मरीजों सेवा करता मिल जाऊंगा। मेरा परिवार मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

2. भंडारपाल का काम संभालते हैं मो. फारूक कैसर

मेरा घर मुंगेर जिला है। लेकिन खगड़िया से मेरे परिवार का पेट पलता है। इसके नमक का कर्ज उतारने का समय आया तो पीछे कैसे भाग जाता। भंडारपाल होने के कारण हमेशा कभी इमरजेंसी तो कभी पीपीई कीट तो कभी दवा आदि की मांग होती रहती थी। इतनी बड़ी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है और ये समय महामारी का है। इसलिए मैंने फैसला लिया कि मैं घर नहीं जाऊंगा यही रहकर मरीजों की सेवा करूंगा। आज एक माह बीत गए हैं। मैं रात को यहीं सो भी जाता हूं। बच्चे लगातार फोन कर मुझे घर बुलाते हैं। उनलोगों को बताता हूं कि घर से बाहर नहीं जाना यह बीमारी कितनी खतरनाक है। यहां मरीजों को बड़ी मुश्किल से ठीक कर घर भेजा जाता है। उन्होंने जिलेवासियों से यह अपील करते हुए कहा कि वे लोग सेवा से पीछे नहीं हटने वाले हैं।

3. कोरोना संक्रमितों तक भोजन पहुंचाते हैं मोहन कुमार, बोले-मरीज ठीक होकर घर जाते तो सुकून मिलता है
रोगियों को वार्ड में जाकर भोजन देता हूं। 10 दिनों से घर नहीं गया हूं। कोविड- पॉजिटिव मरीजों तक भोजन पहुंचाना भी एक अलग अनुभव रहा। बहुत सकून मिलता है जब आप किसी बीमार को ठीक कर वापस घर भेज देते हैं। कोविड वार्ड में भर्ती मरीज को भी समय- समय पर भोजन व नाश्ता कराने में डटे हुए हैं। इन्होंने कहा कि कोविड रोगियों को वायरस को हराने में भोजन की क्या भूमिका है यह किसी से छिपा नहीं है। मुझे यह पता है कि मरीजों के लिए मुझे क्या करना है। लेकिन आम लोगों को भी यह समझना होगा कि बीमारी के लपेटे में आकर यहां भर्ती होने से अच्छा है कि वे लोग घर में रूक कर कोरोना के चेन को तोड़ने में स्वास्थ्य कर्मियों, प्रशासन और पुलिस की मदद करें। मैं पिछले 10 दिनों से घर नहीं गया हूं। घर से फोन आता है तो बात कर लेता हूं नहीं तो उसके लिए भी समय नहीं मिल पाता है।

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