शिक्षक ने बेटी को स्कूल जाने से रोका, फांसी लगाई:मां के बाजार नहीं ले जाने से नाराज थी, पिता बोले- घर की देखभाल करो

खगड़िया13 दिन पहले
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12 साल की बच्ची की उसके घर में फंदे से लटकी लाश मिली। - Dainik Bhaskar
12 साल की बच्ची की उसके घर में फंदे से लटकी लाश मिली।

खगड़िया में एक घर से 12 साल की बच्ची की फंदे से लटकी हुई लाश मिली है। पड़ोसियों का कहना है कि बच्ची की मां आज सुबह खरीदारी करने भागलपुर जा रही थी। बच्ची ने जिद की उसे भी जाना है। लेकिन मां बोली तुम स्कूल चली जाना है। इसके बाद जब वह स्कूल के लिए तैयार हुई तो पिता ने यह कहकर रोक दिया कि आज स्कूल नहीं जाओ क्योंकि घर सूना पड़ जाएगा। आशंका है कि इसी गुस्से में उसने फांसी लगा दी।

घटना परबत्ता थाना क्षेत्र के सिराजपुर गांव की है। बुधवार दोपहर सुमन चौधरी स्कूल में पढ़ा रहे थे, तभी उन्हें पड़ोसियों ने फोन पर बेटी की मौत की सूचना दी। सुमन घर आए तो दंग रह गए। अपनी इकलौती बेटी राधा रानी को फंदे से लटकते देख फफक पड़े। हादसे के वक्त राधा की मां भागलपुर गई थी।

मासूम के फंदे से झूलने वाली खबर से इलाके में सनसनी मच गई। इधर, सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। राधा रानी के गले पर फंदे के काले निशान पड़ गए थे। कुछ लोग मामले को संदिग्ध भी बता रहे हैं। परबत्ता थानेदार ने बताया कि बच्ची की आत्महत्या की बात सामने आ रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

घटना के बाद रोते-बिलखते परिजन।
घटना के बाद रोते-बिलखते परिजन।

पंखे से झूलती मिली लाश
पुलिस का कहना है कि ऐसा लगता है कि राधा पहले पलंग पर चढ़ी होगी। उसके बाद उसने वहां पर अटैची रखी। अटैची पर चढ़कर वह धोती के सहारे पंखे से झूल गई और अटैची को पैर से गिरा दिया होगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मनो वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार ने बताया कि बच्ची की उम्र देखकर प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगा रह है। अमूमन इतनी उम्र की बच्ची ऐसा कदम नहीं उठा सकती है। 12 साल में उम्र किशोरावस्था की शुरूआत होती है। माता-पिता के बीच विवाद, या अपनी अनदेखी से बच्चे अवसादग्रस्त भी हो सकते हैं। आम भाषा में इसे चाइल्डहुड डिप्रेशन कहते हैं। इंटरनेट पर देख बच्चे ऐसा कदम उठा सकते हैं। बहरहाल पुलिस को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। आत्महत्या के अलावा दूसरे एंगल से भी मामले की जांच करें।