छठ में खगड़िया के सूप की दिल्ली-पंजाब में डिमांड, VIDEO:30 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार, 4 महीने पहले से ही मिलता है ऑर्डर

खगड़िया7 महीने पहले
छठ महापर्व के लिए सूप बनाते हुए कारीगर।

लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे बिहार सहित आसपास के राज्यों में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस महापर्व के मौके पर मुख्य रुप से पूजा में उपयोग होने वाली सूप-डाला की विशेष डिमांड होती है। आस्था के इस पर्व के बहाने महादलित परिवारों का रोजगार इस दौरान चरम पर होता है। इससे उन्हें बेहतर आमदनी भी मिलती है। खगड़िया जिले में करीब 3 हजार महादलित परिवार इस रोजगार से जुड़े हैं। पर्व को लेकर खगड़िया में तैयार सूप-डाला की बिक्री बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा आसपास के पड़ोसी राज्य यूपी, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली समेत पंजाब तक होती है। मतलब खगड़िया के सूप-डाला की डिमांड छठ पूजा में बढ़ जाती है।

4 महीने पहले से होती है तैयारी
यहां के मल्लिक समुदाय छठ के चार माह पूर्व से सूप एवं डाला बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं। इस संबंध में खगड़िया बस स्टैंड में रहने वाले छोटू मल्लिक एवं बिनोद मल्लिक बताते हैं कि बांस से निर्मित सामग्रियों की काफी डिमांड रहने के कारण इसकी तैयारी कई माह पूर्व से की जाती है। इस कार्य में उनके परिवार की महिलाएं भी महती भूमिका निभाती है। उनके सहयोग से तैयार सामग्री को वे लोग बाहर के बाजारों में बेचते हैं।

खगड़िया की टोकरी की बढ़ती है मांग
मल्लिक समुदाय से आने वाले मानसी के जवाहर मल्लिक ने बताया कि छठ पूजा में सूप के अलावा खगड़िया से टोकरी की भी मांग की जाती है। उन्होंने कहा कि टोकरी पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली एवं हरियाणा तक भेजी जाती हैं। उन्होंने बताया कि बाहर के व्यपारी खास तौर पर खगड़िया से सूप व टोकरी को मंगवाते हैं।

52 से 100 रुपए तक होती है कीमत
सूप और डाला बनाने वालों ने बताया कि बाहर के व्यापारी सूप की कीमत 52 रुपए से 55 रुपए तक अदा करते हैं, जबकि इसे खगड़िया की बाजार में 100 रुपए तक बेची जाती है। कारीगरों की माने तो वे लोग खगड़िया की जरूरतों को देख ही राज्य से बाहर अपने सामानों को भेजने का काम करते हैं।

30 लाख का होता है कारोबार
एक अनुमान के तहत छठ पूजा में खगड़िया से बाहर के राज्यों में करीब 30 लाख रुपए तक का कारोबार किया जाता है, हालांकि खगड़िया के बाहर सूप के कारोबार करने वाले कारोबारी उन लोगों को दशहरा से पहले ही एडवांस कर देते हैं। बिनोद मल्लिक बताते हैं कि खासकर अपने जिले में बिकने वाले सूपों की कीमत अमूमन वे लोग 60 से 65 रुपए लेते हैं, लेकिन बाहर भेजे जाने वाले सूपों की कीमत कम रहती है। वे लोग थोक में सूप 50 से 52 रुपए प्रति पीस की दर से बेचते हैं। खासकर उनलोगों की सूप का डिमांड सीमावर्ती जिले सहरसा, मधेपुरा, बेगूसराय, समस्तीपुर व दरभंगा में ज्यादा है। वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिम बंगाल में भी यहां की सूपें भेजी जाती हैं।

रिपोर्ट: अभिजीत कुमार

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