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पुलिस की कार्रवाई:जीएनएम के वेतन भुगतान के लिए गोगरी अस्पताल प्रभारी व सीएस ऑफिस के लिपिक को घूस लेते किया गिरफ्तार

खगड़िया13 दिन पहले
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निगरानी टीम की गिरफ्त में गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी लाल घेरे में(लाल घेरे में)। - Dainik Bhaskar
निगरानी टीम की गिरफ्त में गोगरी रेफरल अस्पताल के प्रभारी लाल घेरे में(लाल घेरे में)।
  • जीएनएम की शिकायत पर पटना से आई निगरानी विभाग की टीम ने की छापेमारी

गोगरी रेफरल अस्पताल में पदस्थापित जीएनएम रूबी कुमारी की शिकायत पर पटना से आई निगरानी विभाग की दो अलग-अलग टीम ने बुधवार की सुबह छापेमारी की। करीब साढ़े नौ बजे खगड़िया और गोगरी में एक साथ छापेमारी करते हुए रेफरल अस्पताल गोगरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुभाषचंद्र बैठा को घुस में लिए गए डेढ़ लाख रुपए तथा सिविल सर्जन कार्यालय खगड़िया में कार्यरत प्रधान लिपिक राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा को 30 हजार रुपए के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

गोगरी में निगरानी डीएसपी विमलेंदू कुमार वर्मा एवं खगड़िया में डीएसपी सर्वेश कुमार सिंह की नेतृत्व में निगरानी की टीम ने एक साथ छापेमारी कर घुस की राशि के साथ अस्पताल प्रभारी और प्रधान लिपिक को गिरफ्तार कर अपने साथ पटना ले गई।

बताते चलें कि रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. एससी सुमन बैठा अपने कार्यालय कक्ष में बुधवार की सुबह जीएनएम रूबी कुमारी से पहले तय की गई घुस की राशि ले रहे थे, तभी निगरानी टीम ने धाबा बोल घुस के रुपए के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

ठीक इसी तरह खगड़िया के कमलपुर स्थित अपने आवास पर सिविल सर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक जीएनएम रूबी कुमारी के पति संजीत कुमार से 30 हजार रुपए ले रहे थे, रुपए लेते ही पहले से जाल बुनकर तैयार निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया। पटना से आए निगरानी डीएसपी विमलेंदू कुमार वर्मा और सर्वेश कुमार सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। इसके लिए हमलोग पहले से दोनों पर नजर रख रहे थे।

8 माह के बकाए भुगतान के एवज में तय हुआ था 1.80 लाख में सौदा

रेफरल अस्पताल में पदस्थापित जीएनएम रूबी कुमारी का वेतन किसी वजह से अगस्त 2020 से स्थगित था। वेतन भुगतान के लिए वे लगातार सिविल सर्जन कार्यालय और अस्पताल प्रभारी के समक्ष चक्कर काट रही थी। मगर वेतन भुगतान के लिए आदेश पत्र निर्गत करवाने के एवज में अस्पताल प्रभारी ने डेढ़ लाख रुपए घुस मांगी थी।

वहीं सीएस कार्यालय के प्रधान लिपिक ने 50 हजार रुपए मांगा था, मगर 30 हजार में सौदा पक्का हुआ था। पीड़ित जीएनएम ने घुसखोरी की शिकायत निगरानी विभाग से की थी। जिसके बाद निगरानी विभाग ने शिकायत का सत्यापन के बाद कार्रवाई में जुट गई।

आवास और क्लीनिक पर भी की गई छापेमारी

खगड़िया के कमलपुर से गिरफ्तार हुए प्रधान लिपिक को निगरानी टीम अपने साथ ले गई तथा उनके कार्यालय और आवास पर की भी जांच की गई। वहीं दूसरी तरफ रेफरल अस्पताल से गिरफ्तार किए गए अस्पताल प्रभारी के किराए के मकान और गोगरी बाजार स्थित क्लीनिक पर भी निगरानी डीएसपी विमलेंदू कुमार वर्मा के नेतृत्व में छापेमारी की गई। इस दौरान गोगरी एसडीपीओ मनोज कुमार, गोगरी थानाध्यक्ष शरत कुमार भी मौजूद थे।

निगरानी की कार्रवाई के बाद सीएस ने साधी चुप्पी

सीएस कार्यालय के प्रधान लिपिक राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा के निगरानी के हत्थे चढ़ने के बाद कार्यालय में हड़कंप मचा रहा। सीएस डॉ. अजय कुमार सिंह ने चुप्पी साध ली। उन्होंने मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। जबकि सूत्रों से जानकारी मिली कि कार्यालय के अंदर इस मामले को लेकर काफी माथापच्ची चल रही थी। कार्यालय के कर्मी इस मामले में अधिकारियों को बचाने में लिए तरह-तरह की तरकीब सोच रहे थे।

प्रबंधक और गार्ड को भी साथ ले गई निगरानी टीम

रेफरल अस्पताल गोगरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुभाष चन्द्र सुमन बैठा को घुस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार करने के बाद मौके से निगरानी विभाग की टीम ने रेफरल अस्पताल के प्रबंधक रिपुंजय कुमार एवं वहां तैनात एक गार्ड को भी हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधक और अस्पताल प्रभारी के बीच सांठगांठ से वहां अन्य अस्पताल कर्मियों से वसूली तथा विभिन्न योजनाओं में लूट खसोट किया जा रहा था।

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