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महेशखूंट बस स्टैंड का हाल बेहाल:मैं महेशखूंट बस स्टैंड हूं... नेताजी कृपया मेरे नाम पर वोट मांगना बंद कीजिए, क्योंकि जनता सब जानती है

खगड़ियाएक महीने पहले
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  • उत्तर बिहार को जोड़ने वाला एनएच-107 और अगुवानी-महेशखूंट रोड का संगम महेशखूंट बस स्टैंड का हाल जानिए

मैं महेशखूंट बस स्टैंड हूं। कभी यहां बिजली, पानी, शौचालय एवं दो दर्जन से अधिक स्टॉल की सुविधा थी, मगर जिम्मेदारों ने मुझ पर ध्यान नहीं दिया तो अब मेरी हालत तबेले जैसी हो गई है। यहां वीरानी छाई रहती है और चौराहा पर वाहनों की भीड़ इलाके को अव्यवस्थित करती है।’’ उत्तर बिहार को जोड़ने वाला एनएच-107 एवं अगुवानी-महेशखूंट रोड के संगम स्थल महेशखूंट एनएच 31 चौराहा का बस स्टैंड करीब डेढ़ दशक से किसी उद्धारक की राह देख रहा है।

इन बीते दिनों में कई चुनाव हुए और कई जनप्रतिनिधियों इलाके का विकास का वादा कर उच्च पद पर आसीन हुए, मगर महेशखूंट बस स्टैंड की हालत नहीं सुधरी। बताते चलें कि कभी बिजली, पानी शौचालय तथा अन्य सुविधाओं से लैस 4 एकड़ में फैले इस बस पड़ाव के जर्जर भवन व जमीन पर वर्तमान में दबंगों ने कब्जा कर लिया है।

यह जगह इन दिनों असामाजिक तत्वों का पनाहगार बनी हुई है और जानवरों का तबेला बनकर रह गया है। खाली पड़ी जमीन का उपयोग लोग गिट्‌टी, बालू के गोदाम के रूप में कर रहे हैं। कई लोगों ने इस भवन को गौशाले का रूप दे दिया है। बताते चलें कि प्रतिदिन हजारों यात्री महेशखूंट चौक से यात्रा करते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी दिक्कत होती है।

नगर परिषद अंतर्गत उक्त बस स्टैंड का अस्तित्व समाप्ति की ओर है। इसके लिए समय-समय पर अधिकारियों व नगर परिषद के समक्ष बुद्धिजीवी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, लेकिन हर बार ढ़ाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती रही है। जबकि इस बस पड़ाव के व्यवस्थित होने से वहां कई लोगों को रोजगार मिल सकता है तथा नगर परिषद को भी इससे अच्छी आय हो सकती है।

यहां से बंगाल, झारखंड सहित अन्य राज्य की मिलती बस
एनएच 31 किनारे तथा महेशखूंट रेलवे स्टेशन के निकट स्थित उक्त बस पड़ाव कई मायने में महत्वपूर्ण है। यहां से बंगाल, झारखंड तथा अन्य कई बड़े शहरों के लिए कई दर्जनों बसें प्रस्थान करती हैं।

उत्तर बिहार को जोड़ने वाली उक्त जगह पर हमेशा लग्जरी बसों तथा छोटे वाहनों का ठहराव होता है। लेकिन यात्रा के लिए आने वाले लोगों को शेड भी नसीब नहीं है। यात्रियों को दुकान या सड़क पर ही खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।

कड़ी धूप और बरसात में यात्री करते हैं वाहन का इंतजार
महेशखूंट के एनएच 31 चौराहा पर सुबह से देर रात तक ऑटो, जिप्सी एवं बसों की भीड़ लगी रहती है। जिसपर यात्रियों को उतारने एवं बैठाने का कार्य किया जाता है।

चौराहे की अति व्यस्त सड़क पर वाहनों के ठहराव से वहां हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। जिसके कारण वहां की स्थिति अव्यवस्थित नजर आती है। यात्रा के लिए आने वाले लोगों को वाहनों के इंतजार में कड़ी धूप और बरसात में सड़क पर ही इंतजार करना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया कभी ध्यान, प्रशासन बेपरवाह

इन डेढ़ दशक में इलाके में कई विधायक और सांसद चुने गए, मगर किसी ने बस स्टैंड को जीवित करने की दिशा में कोई पहल नहीं की। जबकि जिम्मेदार अधिकारी भी बेपरवाह बने रहे।

स्थानीय लोगों ने इसको लेकर कई बार जिला प्रशासन से मांग भी की, मगर सिर्फ आश्वासन पर आश्वासन ही मिला, इधर बस स्टैंड की दुर्दशा बिगड़ती चली गई। बताते चलें कि बस स्टैंड जिला परिषद के अधीन है, मगर जिला परिषद ने कभी इसको लेकर गंभीर नहीं हुए।

सड़क पर लगे वाहनों से होती है अवैध वसूली

बस पड़ाव की जमीन वीरान पड़ी है तो दूसरी तरफ एनएच पर ही बस स्टैंड संचालित होती है। दबंगो द्वारा वसूली भी की जाती है। ऐसी स्थिति में पुलिस व प्रशासन भी मूकदर्शक बने रहते हैं। महेशखूंट बस स्टैंड परिसर काफी बड़ा है।

जहां फुटकर विक्रेताओं को व्यवस्थित कर दिया जाय तो काफी लोगों को रोजगार मिल सकता है और इससे जिला परिषद को अच्छी खासी आय भी हो सकती है। बस स्टैंड के डाक से प्रतिवर्ष लाखों रुपए की आय हो सकती है।

जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना चाहिए
बस स्टैंड चालू अवस्था में हो जाय तो बहुत से लोगों की समस्या समाप्त हो सकती है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना चाहिए, प्रशासनिक स्तर से भी इसके लिए प्रयास किया जाएगा -
सुभाषचंद्र मंडल, एसडीओ, गोगरी

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