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आरोप:शराबबंदी फेल, अधिकारियों की कमाई का बन चुका है जरिया, कार्रवाई की मांग

खगड़िया6 दिन पहले
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  • सरकार में बैठे लोग इस कानून को अपने सुविधानुसार कर रहे हैं इस्तेमाल: गुड‌्डू

खगड़िया सहित पूरे बिहार में पिछले कई सालों से शराबबंदी है, लेकिन यह कानून अब केवल राजनीतिक हथियार बन कर रह गई है। जिसे सरकार में बैठे लोग अपने सुविधानुसार इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कानून सरकारी फाइलों में ही दबकर दम तोड़ रही है। जबकि धरातल पर आए दिन विभिन्न थानों की पुलिस द्वारा शराब की छोटी-बड़ी खेप पकड़ी जा रही है। इसके बावजूद सरकार शराबबंदी के सफलता की बात करते थक नहीं रही है। उक्त बातें प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए जन अधिकार युवा परिषद के जिलाध्यक्ष अभय कुमार गुड्डू ने कही। उन्होंने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी को पांच साल से अधिक हो गए लेकिन इस धंधे की संचालन के लिए बकायदा चेन बना हुआ है। इस चेन के सदस्य अलग-अलग लेवल पर काम कर शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले पीने वालों को शराब के लिए काउंटर तक जाना पड़ता था लेकिन अब उन्हें घर पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। गुड्डू ने कहा कि इस धंधे में अब तो थाना स्तर के पुलिस पदाधिकारी भी हाथ सेक रहे हैं।

चौकीदार की तैनाती के बाद भी खुलेआम बनती और बिकता है शराब
जन अधिकार युवा परिषद के जिलाध्यक्ष ने कहा कि बिहार सरकार गांव में चौकीदार की तैनाती किए हुए हैं। बावजूद जिले में शराब खुलेआम बनता है और बिकता है। यहां बड़ा सवाल यह खड़ा होता है आखिर किसके संरक्षण में शराब का धंधा इतना फल फूल रहा है? आखिर क्यों पुलिस प्रशासन शराब माफिया पर नकेल कसने में विफल साबित हो रहें हैं। पुलिस का गुप्त तंत्र कैसे कमजोर हो गया है? क्या इस स्थिति में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महत्त्वाकांक्षी कदम शराबबंदी को पुलिस प्रशासन सफल होने देगी?

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