आयोजन:कलम जीवियों ने कलम-दवात के अराध्य देवता भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना की

खगड़िया22 दिन पहले
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खगड़िया चित्रगुप्तनगर मंदिर में पूजा- अर्चना करते श्रद्धालुगण। - Dainik Bhaskar
खगड़िया चित्रगुप्तनगर मंदिर में पूजा- अर्चना करते श्रद्धालुगण।
  • खगड़िया चित्रगुप्त नगर स्थित मंदिर परिसर में बिरादरी भोज, फतेहपुर गांव में मेला का आयोजन

चित्रगुप्त महापरिवार की ओर से शहर के चित्रगुप्तनगर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में शनिवार को कलम जीवियों ने कलम-दवात के अराध्य देवता भगवान चित्रगुप्त की सामूहिक पूजा आराधना परंपरागत तरीके से किया। मुख्य यजमान की भूमिका में अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा व मुकेश कुमार थे। पूजन कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक नारायण कर्ण, उपाध्यक्ष नीलरत्न अम्बष्ट, महासचिव रविश चंद्र, राकेश चंद्र (अपर सत्र न्यायाधीश) संजय कुमार सिन्हा, उमाशंकर प्रसाद, सुनील कुमार श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव अजिताभ सिन्हा, पवन कुमार सिन्हा, गोपाल कुमार, आलोक अष्ठाना आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर चित्रांश मिलन समारोह सह बिरादरी भोज का आयोजन किया गया। वहीं गोगरी प्रखंड के फतेहपुर में श्री श्री 108 चित्रगुप्त मंदिर में धूमधाम से भगवान चित्रगुप्त की पूजा की गई। जहां बनारस से आए पंडित के वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। वहीं सार्वजनिक पूजा के बाद ग्रामीणों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इसके साथ ही वहां तीन दिवसीय मेला का आयोजन शुरू किया गया। गौरतलब है कि चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर फतेहपुर गांव में कई दशकों से चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा मेला का आयोजन किया जाता है। मेला में पूजा समिति की ओर से भव्य पंडाल एवं आकर्षक तोरणद्वार का निर्माण कराया गया है जो मेला में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मेला में रविवार एवं सोमवार की रात्रि नाटक, दिन में क्विज प्रतियोगिता, डांस प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, खेलकूद प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा।

अधर्म पर धर्मराज यमपुरी में विचार करना है कर्तव्य
पौराणिक मान्यातों के अनुसार सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने एक दिन सुर्य के समान अपने ज्येष्ठ पुत्र को बुलाकर कहा था कि वे किसी विशेष प्रायोजन से समाधिस्थ हो रहे हैं और इस दौरान वह यत्नपूर्वक सृष्टि की रचना करें। इसके बाद 11 हजार वर्षों तक समाधि ले ली थी। जब उनका समाधि टूटा तो ब्रह्मा जी ने देखा कि उनके सामने एक दिव्य पुरुष कलम व दवात के साथ खड़ा है। ब्रह्मा जी ने कहा कि तुम मेरे शरीर से उत्पन्न हुए हो इस लिए तुम्हें कायस्थ जाति की संज्ञा दी जाती है तथा पृथ्वी पर तुम कायस्थ जाति के नाम से विख्यात होगे। धर्म अधर्म पर धर्मराज यमपुरी में विचार करना तुम्हारा कर्तव्य होगा।

फतेहपुर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में पूजा करते पंडित।
फतेहपुर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में पूजा करते पंडित।

चित्रगुप्त पूजन में आदी-गुड़ के प्रसाद का है विशेष होता है महत्व
प्रसाद के रूप में आदी एवं गुड़ चढ़ाने के पीछे मनुष्य में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कामना को माना जाता है। बताया जाता है कि कार्तिक मास प्रारंभ होते हुए मौसम में अचानक परिवर्तन शुरू हो जाता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियों का बढ़ना स्वभाविक है। ऐसे में आदि एवं गुड़ प्राकृतिक उपचार के रूप में औषधीय माना जाता है।

क्यों की जाती है भगवान चित्रगुप्त की पूजा
कलम के देवता के रूप में पूजे जाने वाले भगवान चित्रगुप्त के वशंज कहे जाने वाले कायस्थ जाति के लोग कार्तिक शुक्ल पक्ष के द्वितीय तिथि को चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम और दवात का इस्तेमाल नहीं करते हैं तथा पूजा के अंत में आय व्यय का लेखा जोखा भगवान चित्रगुप्त को समर्पित करते हैं। पुराणों के अनुसार धर्मराज चित्रगुप्त अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर के न्याय करने वाले हैं। आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध किया है कि हमारे मन में जो भी विचार आते हैं वे सभी चित्रों के रुप में होते हैं। भगवान चित्रगुप्त इन सभी विचारों के चित्रों को गुप्त रूप से संचित करके रखते हैं। अंत समय में ये सभी चित्र दृष्टिपटल पर रखे जाते हैं एवं इन्हीं के आधार पर जीवों के पारलोक व पुनर्जन्म का निर्णय सृष्टि के प्रथम न्यायाधीश भगवान चित्रगुप्त करते हैं। विज्ञान ने यह भी सिद्ध किया है कि मृत्यु के पश्चात जीव का मस्तिष्क कुछ समय कार्य करता है और इस दौरान जीवन में घटित प्रत्येक घटना के चित्र मस्तिष्क में चलते रहते हैं। इसे ही हजारों वर्षों पूर्व हमारे वेदों में लिखा गया है। जिस प्रकार शनि देव सृष्टि के प्रथम दण्डाधिकारी हैं, उसी प्रकार भगवान चित्रगुप्त सृष्टि के प्रथम न्यायाधीश हैं तथा उन्हें न्याय का देवता माना जाता है। मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात, पृथ्वी पर उनके द्वारा किए गये कार्यों के आधार पर उनके लिए स्वर्ग या नरक का निर्णय लेने का अधिकार चित्रगुप्त के पास है।

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