सूप से समृद्धि:खगड़िया में बने सूप से दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में होता छठ का त्योहार, ~50 लाख के कारोबार का अनुमान

कुमार अनुज | खगड़ियाएक महीने पहले
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छठ के लिए सूप की तैयारी 24 घंटे चलती रहती है परिवार के सभी सदस्य इसमें हाथ बंटाते हैँ। - Dainik Bhaskar
छठ के लिए सूप की तैयारी 24 घंटे चलती रहती है परिवार के सभी सदस्य इसमें हाथ बंटाते हैँ।
  • 6 माह पूर्व से मिलने लगते हैं ऑडर, 10 हजार से ज्यादा महादलित परिवार को मिलता है रोजगार
  • बस स्टैंड नजदीक होने से स्टॉक बचने के लिए विस्तृत बाजार मिल जाती है

लोक आस्था का महापर्व छठ में खगड़िया के महादलित परिवारों की भूमिका अहम ही नहीं होती बल्कि बढ़ जाती है। यहां निर्मित सूप से बिहार, दिल्ली, पंजाब, झारखंड, पंजाब पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में छठ व्रतियां हाथ उठाती है। सूप के लिए यहां के महादलित परिवारों को 6 माह पूर्व से ही ऑडर मिलने लगते हैं। लगभग 10 हजार महादलित परिवार के सदस्य एवं बच्चों को इस समय रोजगार मिल जाता है। सभी मिलकर लगभग 50 लाख रुपए का करोबार करते हैं। लोकआस्था के इस पर्व के बहाने महादलित परिवारों का रोजगार इस दौरान चरम पर होता है। इससे महादलित परिवार को बेहतर आमदनी भी होती है। मतलब खगड़िया के सूप-डाला का डिमांड छठ पूजा में बढ़ जाता है। बच्चे के हाथ में भी सूप बनाने की हुनर ऐसी कि एक सूप को महज 15 मिनट में बिन कर तैयार कर लेते हैं।

पुरुषों के साथ-साथ महिला और बच्चे भी निभाते हैं अहम भूमिका

महादलित परिवार से आने वाले सरयुग कुमार, चंदन कुमार, छोटू मल्लिक, विनोद मल्लिक समेत अन्य लोगों ने बताया कि उनहें छह माह पूर्व से ही सूप बनाने के ऑडर विभिन्न राज्यों से मिलने लगते हैं। बस स्टैंड में होने का उनलोगों को फायदा यह मिलता है कि उनलोगों के द्वारा निर्मित सूप तैयार होते ही गाड़ी से डिलेवरी के लिए भेज दिया जाता है। दो से तीन दिनों के अंदर लोगों को बना-बनाया ताजा सूप पहुंच जाता है। यही यहां की खासियत है कि यहां से लोग सूप लेने में प्राथमिकता दिखाते हैं। इनलोगों ने बताया कि वे लोग नगर परिषद में काम करने के साथ-साथ यह काम भी कर लेते हैं। इस कार्य में सबसे अधिक महत्ती भूमिका महिलाएं और बच्चे निभाते हैं।

बचपन से सीखते हैं सूप बनाना।
बचपन से सीखते हैं सूप बनाना।

100 से 200 तक होती है एक सूप की कीमत
महादलित परिवार के सदस्य बताते हैं कि उनलोगों को एक सूप के 100 से 200 रुपए तक आसानी से मिल जाते हैं। उनलोगों ने बताया कि जिनका ऑडर 6 माह पूर्व मिलता है उन्हें सूप कम कीमत पर भी मिल जाता है। लेकिन जैसे-जैसे लोक आस्था के महापर्व का समय करीब आता है वैसे-वैसे सूप की कीमत भी बढ़ती जाती है। सूप निर्माण के कारोबार से जुटे लोगों ने बताया कि वे लोग सूप बनाकर स्टॉक नहीं करते हैं। ऑडर के अनुसार बनाकर तुंरत इसकी डिलेवरी कर देते हैं।

महापर्व छठ को लेकर सूप और डलिया की मांग तेेजी से बढ़ रही है।
महापर्व छठ को लेकर सूप और डलिया की मांग तेेजी से बढ़ रही है।

दूसरे राज्याें के व्यापारी पहले ही कर देते हैं एडवांस ऑडर

महादलित परिवार के सदस्यों ने बताया कि छठ हर घर में होने वाले पर्व है। छठ पूजा में बिहार समेत अन्य राज्यों से एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 लाख रुपए तक का कारोबार होता है। हालांकि खगड़िया के बाहर सूप के कारोबार करने वाले कारोबारी उनलोगों को अगस्त से ही संपर्क करने लगते हैं। एडवांस प्राप्त होते ही काम शुरू कर दिया जाता है। चंदन ने बताया कि अपने जिले में बिकने वाले सूपों की कीमत अमूमन वे लोग 60 से 65 रुपए लेते हैं, लेकिन बाहर भेजे जाने वाले सूपों की कीमत अधिक होती है। वे लोग थोक में सूप 80 से 200 रुपए प्रति पीस की दर से बेचते हैं। खासकर उनलोगों की सूप का डिमांड सीमावर्ती जिले सहरसा, मधेपुरा, बेगूसराय, समस्तीपुर व दरभंगा में ज्यादा है।

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