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भास्कर मुहिम:समाज के लोगों ने मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगाने का लिया संकल्प

खगड़िया10 महीने पहले
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  • मृत्य भोज के बदले समाज को विकासशील करने में योगदान देने का लिया निर्णय

खगड़िया के विभिन्न समाज के लोगों ने मृत्युभोज का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है। हालांकि पूर्व से भी खगड़िया के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहल पर कुछ लोगों ने मृत्युभोज का बहिष्कार किया था एवं भोज में खर्च होने वाले राशि से समाजिक कार्य में सहयोग कर दिया था। लाॅकडाउन एक ऐसा समय आया कि कुछ अपवादों को छोड़ 90 फीसदी लोगों ने मृत्युभोज नहीं कर सिर्फ ब्राह्मणों को ही भोजन कराकर कर्मकांड पूरा किए। मृत्युभोज को लेकर भास्कर मुहिम का समर्थन करते हुए जिले के सैकड़ों लोगों मृत्युभोज ना खाने एवं ना ही करने का निर्णय लिया है। मानसी के अमनी पंचायत में बैठक कर मृत्युभोज पर बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। खगड़िया के डाॅ स्वामी विवेकानंद ने भी आपने पिता के मृत्युभोज मृत्यु के पश्चात मृत्युभोज नहीं कर समाज के गरीब तबके के लोगों के बीच गौ दान करने का निर्णय लिया एवं समाज लोगों से भी यह अपील किया कि वे भी मृत्युभोज नहीं जितना सामर्थ्य हो समाजिक विकास में योगदान दें।

बहकावे में आकर मृत्यु भोज पर होने वाले फिजूल खर्च बंद करें

सैदपुर के कुमार गौरव ने बताया कि मृत शरीर से आत्मा निकल कर कभी किसी जीवित व्यक्ति को यह कहा है कि मेरे मृत शरीर को दफनाओं या फिर जलाओ। 12 दिन तक बिना नमक वाला भोजन खाना, भजन कीर्तन करवाना अगर ऐसा नहीं किया तो मुझे शांति नहीं मिलेगी। दूसरों के बहकावे में आकर मृत्युभोज पर होने वाले फिजूल खर्च बंद करें।

मृत्यु भोज से  पाखंडियों के अलावा किसी को कोई लाभ नहीं है

अमनी पंचायत के पूर्व मुखिया प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि यह ढोंग एक मानवीय रचनात्मक रिवाज है। जिसे समाज को लोगों द्वारा बस ढोया जा रहा है और इससे पाखंडियों के अलावा इससे किसी को कोई लाभ नहीं है। इसी रिवाज के कारण आज सैकड़ों परिवार जो दल दल में धंसते जा रहे हैं। क्या लाॅकडाउन के दौरान निधन होने वाले व्यक्ति के आत्मा को शांति नहीं मिली।

समाज के लोगों को जागरूक होने की जरूत है, तभी इस पर लगेगी रोक

मटिहानी के अजीत कुमार ने कहा कि इंसान को जो करना हो जीवित में ही करे मृत्यु पश्चात उसपर  किया गया खर्च व्यर्थ है। समाज को भी इससे जागरूक जागरूक होने की जरूरत है। किसी भी इंसान को मृत्यु से पहले अपने जीवन काल में हीं जो करना है कर डालना चाहिए। गरीबों में दान देना हो तो दे देना चाहिए, भूखे को खाना खिलाना हो खिला देना चाहिए, गरीब बीमार बच्चों का इलाज करवाना हो या अन्य कार्य।

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