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फसल बर्बाद:24 घंटे में कोसी और बागमती के जलस्तर में 25 25 सेंटीमीटर की हुई वृद्धि, बाढ़ का खतरा बढ़ा

खगड़ियाएक महीने पहले
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नेपाल के तराई के साथ- साथ उत्तर बिहार में हो रहे लगातार बारिश से कई नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। जिले में शुक्रवार को पिछले 24 घंटे में कोसी नदी के जलस्तर में 25 सेंटीमीटर तथा बागमती के जलस्तर में भी 25 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ते जलस्तर से निचले इलाके के किसानों का हलख सूखने लगा है। धान व मक्का की खेती करने वाले किसान संभावित बाढ़ से फसल बर्बाद होने को लेकर आशंकित है।

बताते चलें कि सात नदियों से घिरे खगड़िया में प्रत्येक वर्ष बाढ़ के कारण हजारों परिवार बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं। गत वर्ष भी गंगा नदी, कोसी, बुढ़ी गंडक व बागमती नदी की जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ ने जिले में बड़ी तबाही मचाई थी। गौरतलब है कि बेलदौर इलाके में कोसी के कटाव से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन कोसी के गर्भ में समा जाता है।

जबकि कोसी किनारे बसे पचाठ, बलैठा, सहरौन, गांधी नगर, पचबिघी, कुंजहारा के साथ अन्य गांव के ग्रामीणों को विस्थापित का दंश झेलना पड़ता है। यहां के विस्थापित परिवार कहीं लीज की जमीन तो कही बांध पर झोपड़ी बनाकर जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। जिसके कारण इन विस्थापितों को अपना जमीन नहीं रहने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना एवं शौचालय अनुदान राशि से भी वंचित हैं। इधर जिला प्रशासन ने दावा किया है कि संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट है।

ऐसी स्थिति रही तो जिले में जल्द ही फैल जाएगा बाढ़ का पानी, निचले इलाके के लोगों को दिक्कत

खतरे के निशान से 1.40 मीटर नीचे कोसी, गंगा के जलस्तर में वृद्धि नहीं
जिले में वर्तमान में कोसी नदी का जलस्तर 32 ़45 है जो खतरे के निशान से मात्र 1 ़40 मीटर कम है। लेकिन कोसी नदी के जलस्तर में तेजी वृद्धि से होने की बात कही जा रही है। वहीं बागमती नदी का जलस्तर 34.25 है, जो खतरे के निशान से 1 ़38 मीटर नीचे है। जबकि बुढ़ी गंडक और गंगा नदी के जलस्तर में अभी कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।

जल्दी नहीं हटाया तो डूब जाएगी फसल
कोसी व बागमती नदी के जलस्तर में तेजी से हो रहे वृद्धि को देख अमनी के किसानों का हाल खस्ता हो गया है। कोसी तटबंध के भीतर खेती करने वाले किसान जल्दी-जल्दी अपने मक्का फसल समेटने में लगे हैं। लेकिन मौसम की मार उन्हें फसल भी समेटने नहीं दे रहा है। जल्दबाजी में अमनी के किसान खेतों में ही फसल तैयार कर व्यापारी को बेचते नजर आए, पूछे जाने में किसानों ने बताया कि नदी में उफान आने लगी है। ऐसे में जल्दी फसल नहीं हटाएंगे तो फसल के डूबने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

सदर प्रखंड का 5 पंचायत कोसी से रहता है प्रभावित, पिछले साल हुए थे हजाराें बेघर
जिले में अमुमन हर वर्ष बाढ़ का प्रकोप से सैकड़ों गांव प्रभावित होता है। कई इलाकों में प्रलयकारी बाढ़ से हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। खासकर सदर प्रखंड के आठ पंचायत प्रत्येक वर्ष बाढ़ से प्रभावित रहता है। 3 पंचायत गंगा नदी तो 5 पंचायत की आबादी कोशी व बागमती नदी से प्रभावित रहता है। बीते वर्ष बाढ़ से बेघर हुए हजारों परिवार को एनएच 31 पर आशियाना बनाकर रहना पड़ा था। जबकि हजारों परिवार बाढ़ राहत कैंप में रह रहे थे।

कोसी के जलस्तर में वृद्धि से जमीनदारी बांध पर दबाव
बीते एक सप्ताह से कोसी नदी जलस्तर में वृद्धि के साथ ही बारूण गांव के समीप जमींदारी बांध पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि बाढ़ पूर्व तैयारी के दौरान विभागीय स्तर से वहां बांध को दुरूस्त किया गया है। उसके बावजूद भी बांध के दक्षिण भाग में कोसी की तेज धारा से कटाव की आशंका है। वहीं नदी किनारे बसे ग्रामीणों में फिर से कटाव से विस्थापित होने का डर सता रहा है।

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