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लापरवाही:जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में क्रिटिकल बच्चों के इलाज की सुविधा नहीं

खगड़िया18 दिन पहले
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टेक्नीशियन के अभाव में धूल फांक रहे वेंटिलेटर। - Dainik Bhaskar
टेक्नीशियन के अभाव में धूल फांक रहे वेंटिलेटर।
  • कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए अबतक नहीं है कोई व्यवस्था
  • पीएम केयर फंड से मिले 6 वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की तैयारी

कोरोना के तीसरी लहर के मद्देनजर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कोई तैयारी अबतक पूरी नहीं हो पाई है। हालांकि स्वास्थ्य महकमा और जिला प्रशासन इसको लेकर सभी तैयारियों को ससमय पूरी कर लेने की बात कह रहा है। मगर भास्कर पड़ताल में जो सामने आया है, उससे यह कहा जा सकता है कि कोरोना महामारी के तीसरी लहर की तैयारी के नाम पर यहां सिर्फ कागजों पर प्लान तैयार किया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में कुल 19 सरकारी एंबुलेंस है। जिसमें एक खराब हालत में खड़ी है। बांकी सभी चालू तो है मगर कोई भी एंबुलेंस वेंटिलेटर से लैस नहीं है। बच्चों की बात ताे दूर जनरल लोगों के लिए भी किसी में विशेष प्रबंध नहीं है। कोरोना के दूसरी लहर जिले के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो थमता दिख रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों और चिकित्सा जगत की मानें तो कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है। जिसमें बच्चों पर ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है। लेकिन इससे कैसे निबटा जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर अभी तक कोई तैयारी नहीं की गई है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को बचाना के लिए लिए का कोई कोविड वार्ड सदर अस्पताल में नहीं बनाया गया है। प्राइवेट अस्पतालों में पहले भी कोरोना के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। बच्चों के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। सदर अस्पताल में नवजात शिशु के लिए एनयूसीसी की व्यवस्था तो है। वह भी सुविधाओं के अभाव में राम भराेसे किसी तरह संचालित हो रहा है। हालांकि सदर अस्पताल में बच्चों के लिए निक्कू वार्ड बनाया गया है, मगर कुपोषित बच्चों के देखभाल के लिए कुपोषण जिला पुर्नवास केन्द्र करीब डेढ़ वर्ष से बंद है। यहां बच्चों के लिए व्यवस्था की बात तो दूर जो सदर अस्पताल की व्यवस्था है। वह भी भगवान भरोसे ही चल रहा है।

सदर अस्पताल में सुविधा युक्त एंबुलेंस व वेंटिलेटर भी नहीं, हो सकती है समस्या
सदर अस्पताल में बच्चों के लिए विशेष सुविधा युक्त एंबुलेस होनी जरूरी हैं। मगर यहां अबतक ऐसा एक भी एंबुलेंस नहीं है। हालांकि सदर अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। इधर सदर अस्पताल को कोविड केयर फंद से सरकार ने 6 वेंटिलेटर उपलब्ध कराया था। इसके अलावा दो वेंटिलेटर अन्य सोर्स से उपलब्ध कराया गया है। लेकिन इसे चलाने वाले विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण सरकार ने छह वेंटिलेटर वापस मंगा लिया है। जिसे किसी मेडिकल कॉलेज में भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। यानी कुल मिलाकर अगर कोरोना का तीसरा लहर आया, और जिस हिसाब से खगड़िया में अभी कोई खास तैयारी नहीं है। इस स्थिति में खुद से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

महामारी से निपटने के लिए तैयारी संतोषजनक नहीं
कोरोना के संभावित तीसरे लहर को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सह वार्ड पार्षद रणवीर कुमार, शिक्षक नेता मनोज कुमार, अधिवक्ता अजिताभ सिन्हा समेत कई लोगों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को संक्रमण का ज्यादा खतरा हो सकता है। इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार ने जिले में सिविल सर्जन को तैयारी के लिए कह दिया है। लेकिन जिले में इससे निबटने की जो तैयारी की अभी तक तस्वीर सामने आ रही है। वह सुखद नहीं दिख रहा है। लोगों ने कहा कि सदर अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, मगर उन संसाधनों के इस्तेमाल के लिए जिस मानव बल की जरूरत है उसे मानव बल की आपूर्ति के लिए सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है।

अभिभावक बच्चों को लेकर बरतें सतर्कता
सदर अस्पताल में बच्चों का कोई कोविड वार्ड नहीं बना है। वहीं बच्चों के लिए जिले में विशेष एंबुलेंस भी नहीं है कि अगर किसी बच्चे को कहीं रेफर भी किया जाता है तो उसे वेंटिलेटर वाली वा ऑक्सीजन से लैस एंबुलेंस भी जिले में नहीं है। ऐसे में काफी दिक्कत हो सकती है।

सरकार का निर्देश मिला है, हो रही है तैयारी
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। इसके कोविड वार्ड बनाया जाएगा। जल्द ही इसको मूर्त रूप दिया जाएगा। सदर अस्पताल में निक्कू वार्ड बनाया गया है। हमें और भी तैयारी करनी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए हर जागरूक व्यक्ति की भूमिका अहम होगी।
- डाॅक्टर अजय कुमार सिंह, सीएस, खगड़िया।

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