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खतरनाक:650 नर्सिंग होम और पैथोलैब से हर दिन निकल रहा 12 क्विंटल बायोवेस्ट, उठाव सिर्फ 4 क्विंटल

किशनगंज | नीरज7 दिन पहले
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सदर अस्पताल के पीछे खुले में फेंका गया बायोवेस्ट। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल के पीछे खुले में फेंका गया बायोवेस्ट।
  • जिले में हैं 143 छोटे-बड़े नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक के साथ-साथ 500 से अधिक पैथो लैब
  • खुली जगहों पर, नदी किनारे व नालियों में फेंके जा रहे बायोवेस्ट, बीमारी की आशंका

जिले में 143 छोटे-बड़े नर्सिंग होम व निजी क्लीनिक हैं। साथ ही 500 से अधिक पैथोलॉजी लैब भी हैं। इनमें से अधिकांश अनिबंधित हैं। प्रतिदिन इन नर्सिंग होम, पैथोलॉजी सेंटर व क्लीनिकों से औसतन 10-12 क्विंटल बायोवेस्ट निकलता है। जिनमें से तीन-चार क्विंटल का ही उठाव होता है। बांकी कचरे खुली जगहों, नदी के किनारे या फिर नालियों में फेंका जाता है। यहां तक कि सदर अस्पताल का बायोवेस्ट भी इन दिनों परिसर के पीछे खुले में बिखरा देखा जा सकता है। मरहम पट्टी, प्लास्टर, इंजेक्शन सहित ऑपरेशन के बाद निकले रक्त व अन्य कचड़ा जहां-तहां फेंके जाने से संक्रमण सहित कई गंभीर बीमारियों की आशंका बनी रहती है। बायो मेडिकल वेस्ट पर नजर रखने के लिए डीएम की अध्यक्षता में टीम गठित है। फिर भी निजी नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक एवं पैथोलॉजी संचालक खुले में कचड़ा फेंककर न सिर्फ प्रशासन को चुनौती दे रहे बल्कि लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। सदर अस्पताल में कार्यरत एक विशेषज्ञ ने कहा कि बायोवेस्ट को खुले में फेंकना गंभीर अपराध की श्रेणी में है। नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक एवं पैथलैब को कचरा निष्पादन की व्यवस्था करना अनिवार्य है। बायोवेस्ट से निकलने वाले कीटाणु व वायरस से जलवायु सहित आमलोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक एवं पैथोलॉजी की यह लापरवाही शहर वासियों के खराब स्वास्थ्य का कारण बन सकता है।

औसतन 10-12 क्विंटल उत्पन्न हो प्रतिदिन रहा है बायो वेस्टेज
जिले में प्रतिदिन लगभग 10-12 किलो बायोवेस्ट उत्पन्न होता है। जबकि उठाव महज तीन से चार क्विंटल का हो पाता है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने कचरा उठाव के लिए सिनर्जी बायो वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड पटना के साथ इकरारनामा किया है। सिनर्जी संस्था से जुड़े प्रतिनिधि सुशांत ने कहा कि जिले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास अपना कचरा निष्पादन करने का आधुनिक प्लांट है। इसके अलावा जिले के लगभग 130 सरकारी व निजी अस्पताल व पैथोलॉजी ने सिनर्जी संस्था से निबंधन करा रखा है। इन्हें हम पॉलीबैग उपलब्ध कराते हैं जिसमें ये बायोवेस्ट जमा कर रखते हैं। इन्हें प्रतिदिन वाहन से भागलपुर लाया जाता है जहां इसे नष्ट किया जाता है।

सिनर्जी संस्था से निबंधन के लिए कई संस्थान कदम नहीं बढ़ा रहे
सिनर्जी संस्था से निबंधन के लिए कई संस्थान कदम नहीं बढ़ा रही। राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिले में संचालित सभी नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब को बायो बेस्ट निष्पादन के लिए निबंधन को अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में कई बार निजी नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक एवं पैथोलॉजी संचालकों को पत्र लिखा जा चुका है। विगत दो दिसंबर को जिला प्रशासन की टीम द्वारा जांच के बाद सभी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम व पैथोलोजी सेंटरों को बायोवेस्ट के निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है। बिना इसके निबंधन नहीं करने की चेतावनी भी दी गई है। उल्लंघन करने पर एक वर्ष की सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।

कचरा निष्पादन करने वालों का ही किया जाएगा अब निबंधन
हाल में ही जिला प्रशासन द्वारा टीम बनाकर जिले के सभी नर्सिंग होम एवं पैथोलॉजी सेंटर की जांच करवाई गई। अधिकांश के पास प्रदूषण बोर्ड का एनओसी नहीं पाया गया था। जिनके पास कचरा निष्पादन एवं प्रदूषण बोर्ड का एनओसी नहीं है उन्हें एक महीने का मोहलत दिया गया है। अगर निर्धारित समय सीमा तक प्रक्रिया पूरे नहीं हुए तो संबंधित पैथोलॉजी एवं नर्सिंग होम को बन्द करवाया जाएगा। पोस्टमार्टम रूम के बगल में 8 फीट गड्ढा बनाकर कचरा डंप करने की व्यवस्था का निर्देश दिया गया है। पहले वाला किट भर जाने के कारण थोड़ा बहुत कचरा इधर-उधर आउट साइड में बिखर गया है।
-डॉ. श्रीनंदन, सिविल सर्जन

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