जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पॉजिटिव होने के बाद खुद को आइसोलेट किया, कहा-आत्मविश्वास से बढ़कर कोई साथी नहीं, ऊंचे मनाेबल से हमने जीती काेराेना से जंग

कुणाल कुमार| कोरोना वारियर6 महीने पहले
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कुणाल कुमार| कोरोना वारियर - Dainik Bhaskar
कुणाल कुमार| कोरोना वारियर
  • कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानी, बैंक ऑफ इंडिया में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत कुणाल कुमार ने हमारे साथ साझा की कोरोना से ठीक होने की कहानी, आजकल गार्डनिंग कर रहे

अगर सोच सकारात्मक रखी जाए तो कोरोना से ठीक होना कोई मुश्किल बात नहीं। ऊंचे मनोबल से कोरोना से जंग जीती जा सकती है। 12 अप्रैल से तबीयत थोड़ी सुस्त लग रही थी। फिर बुखार आने लगा। 14 अप्रैल को जांच कराया तो पॉजिटिव आ गया। मुझे लगता है कि शायद बैंक में ही या फिर कहीं भी तमाम नियमों का पालन करते हुए भी मैं संक्रमित हो गया। मैंने तत्काल चिकित्सक की सलाह ली और अपने आप को घर में आइसोलेट कर लिया। डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाइयों का सेवन करने लगा। इसके अलावे सुबह-शाम गरारा करना और भाप लेना शुरू किया। कोशिश करता था कि हमेशा सकारात्मक सोच सकूं, लेकिन बुखार को खत्म होने में चार पांच दिन लग गए। बुखार खत्म हो गया तो फिर खांसी शुरू हो गई। मैं लगातार अपने चिकित्सक के संपर्क में था। बीमारी के दौरान हल्का डर तो बना हुआ था पर मैं समझ रहा था कि मुझे जल्दी ठीक होना है और काम पर जुट जाना है। बहुत सारे काम पेंडिंग हैं। इसके अलावे अपने घर के सदस्यों का भी ख्याल रखना है। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां बढ़ा दी। दो दिनों में खांसी भी ठीक हो गई। इस दौरान कमजोरी खूब होती है। इसके लिए पौष्टिक खाना के साथ फल, जूस और दूध में हल्दी डालकर पीता रहा। नतीजा रहा कि अब मैं ठीक हूं। थोड़ी कमजोरी है पर यह भी दो चार दिनों में खत्म हो जाएगी। अभी भी होम आइसोलेशन में ही हूं। किचन गार्डेन और गमलों में लगे फूल पत्तियों की देखभाल कर रहा हूं। प्राणायाम भी करना शुरू किया है। इस बीमारी में मैंने अनुभव किया कि आत्मबल मजबूत रहने से मरीज जल्द स्वस्थ होते हैं। इसलिए बीमार होने पर लोगों को आत्मविश्वास रखना चाहिए कि मुझे इससे जल्द ठीक होना है। (दिलावरगंज निवासी कुणाल कुमार बैंक ऑफ इंडिया में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।)

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