नया खुलासा:पुलिस के पहुंचने से पहले ही अपराधियों ने हल्ला कर जुटाई भीड़, फैलाई अफवाह-पुलिस के वेश में गांव आ रहे हैं डकैत

किशनगंज8 महीने पहले
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बंगाल का पंतापाड़ा गांव, जहां हत्या के बाद लोगों की आवाजाही कम हो गई है। - Dainik Bhaskar
बंगाल का पंतापाड़ा गांव, जहां हत्या के बाद लोगों की आवाजाही कम हो गई है।
  • बंगाल के पांजीपाड़ा के पंतापाड़ा गांव में किशनगंज थानाध्यक्ष की पीट-पीटकर हत्या मामले में अपराधियों ने पहले ही रची थी साजिश
  • पंतापाड़ा बाइक छिनतई गिरोह के दो सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद तीसरे आरोपी को पकड़ने गई थी पुलिस

थानाध्यक्ष हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। पांजीपाड़ा पुलिस ओपी क्षेत्र के जिस पंतापाड़ा गांव में थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार की हत्या हुई थी, उस गांव में अपराधियों ने पुलिस टीम के पहंुचने के पूर्व ही भीड़ जुटा ली थी। एसडीपीओ अनवर जावेद अंसारी ने बताया कि पुलिस के रेड से पूर्व अपराधियों ने एक बड़ा षडयंत्र रचा था। बदमाशों ने ग्रामीणों को एकजुट होकर रहने को कहा था। ग्रामीणों के बीच यह अफवाह फैलाई गई कि डकैत पुलिस के वेश में गांव आ रहे हैं, जो बड़ी डकैती या आपराधिक घटना को अंजाम दे सकते हैं। पुलिस टीम के पहुंचने पर सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस को घेरकर हमला बोल दिया। इसमें कुछ पुलिस अधिकारी भाग निकले और थानेदार भीड़ के शिकार हो गए, जहां ग्रामीणों ने पीट-पीट कर थानाध्यक्ष की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड इसराइल और फिरोज है, जिसे घटना के बाद बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उधर, इस मामले में पुलिस ने बाइक छिनतई गिरोह के आरोपी किशनगंज के शाह जमाल को भी गिरफ्तार किया है। इस केस में यह आठवीं गिरफ्तारी है।

क्या है मामला
बताते चलें कि बाइक छिनतई की घटना पर थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार के साथ पुलिस टीम बंगाल के ग्वालपोखर थाना क्षेत्र के पंतापारा में 10 अप्रैल की अहले सुबह छापेमारी की थी, जहां बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। माहौल बिगड़ने के बाद पुलिस टीम भाग निकली और लोगों ने थानेदार की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

मामले में अब तक आठ आरोपी की गिरफ्तारी
इस पूरे मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी बंगाल और बिहार की पुलिस ने की है। बाइक लूट के मामले में तीन गिरफ्तारी किशनगंज में विभिन्न जगहों से सदर पुलिस ने की है। इसमें मतिबुल, अंसारुल व शाह जमाल की गिरफ्तारी हुई है। वहीं थानाध्यक्ष की हत्या के बाद पांजीपाड़ा पुलिस ओपी क्षेत्र के पंतापाड़ा गांव से पांच आरोपी फिरोज आलम, अबुजर आलम, शाहीनुल खातून, मलिक उर्फ अब्दुल मलिक व इसराइल की गिरफ्तारी बंगाल पुलिस ने की है।

बाइक लूट का मास्टरमाइंड जाकिर अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर
थानाध्यक्ष हत्याकांड का किंगपिन जाकिर अब भी पुलिस की पहुंच से दूर है। पंतापाड़ा में जिस घर में थानाध्यक्ष की हत्या हुई वो जाकिर का ही ससुराल है। नौ अप्रैल की रात शहर से सटे ढेकसरा मुख्य सड़क पर बाइक लूट की घटना हुई थी। घटना के पीड़ित मुश्फिक आलम ने मौके पर जांच के लिए पहुंचे टाउन थानाध्यक्ष को बताया कि उसकी बाइक को छगलिया निवासी मो. जाकिर ने अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ लूट लिया। थानाध्यक्ष जाकिर के छगलिया स्थित घर गए तो वहां उसके परिजनों ने बताया कि वो अपने ससुराल पंतापाड़ा गया है। तब थानाध्यक्ष के साथ दो टीम पंतापाड़ा गई।

अपराधियों ने पहले ही भीड़ जुटा ली थी
अपराधियों ने पूर्व से ही अपने सहयोगियों सहित ग्रामीणों की भीड़ जुटा कर रखी थी। बड़ा षडयंत्र था। ग्रामीणों को बताया गया कि पुलिस के वेश में अपराधी बड़े आपराधिक घटना को अंजाम देने आ सकते हैं।
अनवर जावेद अंसारी, एसडीपीओ, किशनगंज

किशनगंज के तत्कालीन डीएसपी अखिलेश कुमार शहीद इंस्पेक्टर अश्विनी के साथ बिताए पल को यादकर हुए भावुक, कहा- उनमें एक ही कमी थी कि उन्होंने मोर्चा छोड़कर भागना नहीं सीखा था

पूर्णिया | पुलिस के लिहाज से उनके साथ अच्छा-खासा समय तक काम करने का मौका मिला था हमें। ढेर सारी यादें हैं जेहन में। उनके अनुभवों का इस्तेमाल कर हमलोगों ने कई केस ससमय सुलझाए थे। कई सफल रेड भी की थी। कई अपराधियों को पकड़े थे। कई लॉ एंड ऑर्डर हैंडल किए थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि कठिन से कठिन परिस्थतियों में चाहे कितनी ही बड़ी भीड़ हो वह अपनी सहजता नहीं खोते थे। ब्लाइंड केसों की गुत्थियों को सुलझाने के लिए एक -एक कड़ी को पकड़ते हुए अंजाम तक पहुंचने की आपकी कला भी अद्भुत थी। मुश्किल से मुश्किल असाइनमेंट देने पर भी उनका एक ही जवाब आता था “ सर हो जाएगा “। ना कहना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था। आम नागरिकों की नजर में वे काफी मिलनसार अधिकारी थे और मेरी नजर में वे फर्म बट पोलाइट ( दृढ़ पर विनम्र) थे और यही तो असली ताकत भी होती है अच्छे पुलिस पदाधिकारी की। पुलिस सेवा के लिए जिस साहस, समर्पण, कमिटमेंट, दृढ़ता, हौंसला और तत्परता की जरूरत होती है वो उनके खून का हिस्सा था। वे जांबाज और दिलेर थे। बस एक ही तो कमी थी कि उन्होंने मोर्चा छोड़कर भागना नहीं सीखा था। उसी कमी के शिकार हो गए। अभी तो कुछ महीने पूर्व जब आप छुट्टी लेकर पटना आए थे। मुझसे मिलने पटना साइंस कॉलेज आए थे। बहुत सारी बातें हुई थी। जिसमें सबसे प्रमुख बात मुझसे कहा था- सर अब आप पुलिस छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में आ गए हैं। हमलोग दुखी होते हैं कि आपका सानिध्य छूट गया, लेकिन खुशी होती है कि अब हमलोगों को अपने बच्चों की शिक्षा दीक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आपके संरक्षण में दे देंगे और निश्चिंत हो जाएंगे। उनके वे शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं। अब मेरी जिम्मेदारी उन्होंने दोगुनी कर दीहै। मैं उसे निभाऊंगा ।
( यह संस्मरण पूर्व डीएसपी व वर्तमान में पटना साइंस कॉलेज के अध्यापक डॉ. अखिलेश कुमार ने दैनिक भास्कर के साथ साझा किया)

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