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विलंब:अररिया-गलगलिया रेल प्रोजेक्ट की धीमी हुई रफ्तार बारिश और लॉकडाउन से प्रभावित हुआ निर्माण कार्य

किशनगंज2 महीने पहले
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प्रस्तावित अररिया गलगलिया रेल लाईन
  • लेटलतीफी का शिकार रहा है प्रोजेक्ट, देरी के कारण लागत हुई चार गुणा ज्यादा
  • जून और जुलाई माह में प्रोजेक्ट मद में खर्च हुए शून्य

देश के पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने वाले एकमात्र रेलखंड एनजेपी-किशनगंज-बारसोई के विकल्प के रुप में उभरी महत्वाकांक्षी अररिया-गलगलिया रेल लाइन प्रोजेक्ट की रफ्तार बारिश ने रोक दी है। एनएफ रेलवे निर्माण के लेखा व वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जून और जुलाई माह में प्रोजेक्ट मद में खर्च शून्य रहा है। जो भी नए टेंडर निकले है उनमें भी कार्य आरंभ नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि भारी बारिश व लॉकडाउन के कारण कार्य प्रभावित हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर वर्तमान में ठाकुरगंज से पौआखाली के 23 किमी सेक्शन में मिट्टी भराई का कार्य चल रहा है। इसी सेक्शन में भोगडावर स्टेशन, कादोगांव हाल्ट और पौआखाली स्टेशन के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इस सेक्शन में 49 करोड़ की लागत से पौआखाली स्टेशन बिल्डिंग, प्लेटफार्म, रेलवे क्वाटर्स, फुट ओवर ब्रिज व कादोगांव हाल्ट स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 50 करोड़ की लागत से दो पुल भी बनाए जाएंगे। वही अररिया की ओर से 5 किमी सेक्शन में मिट्टी भराई की निविदा जारी की गई है।

200 करोड़ की जगह मिले नगण्य राशि
एनएफ रेलवे कंस्ट्रक्शन के लेखा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले बजट में प्रोजेक्ट के लिए एनएफ रेलवे ने रेलवे बोर्ड से 200 करोड़ रुपयों की मांग की थी लेकिन मिले सिर्फ एक हजार रुपये। उन्होंने बताया कि जून 2020 तक प्रोजेक्ट की कुल लागत 2145 करोड़ में 980 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है। इन 980 करोड़ में 858 करोड़ रुपयों की राशि भूमि अधिग्रहण हेतु बिहार सरकार को दी गयी है।

अप्रैल 2007 में स्वीकृत हुई थी अररिया-गलगलिया रेल प्रोजेक्ट
अप्रैल 2007 में स्वीकृत हुए इस प्रोजेक्ट को मूल रूप से मार्च 2011 तक पूरा करना था। लेकिन वर्ष 2019 के अक्टूबर माह के बाद ही प्रोजेक्ट में निर्माण गतिविधियां शुरू होने के फैसले हुए है। दैनिक भास्कर के पास उपलब्ध रेलवे बोर्ड के डाक्यूमेंट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट की लागत 530 करोड़ से बढ़कर 2145 करोड़ हो गई है। रेलवे बोर्ड (वर्क्स) के एक वरीय अधिकारी बताते है कि प्रोजेक्ट लागत में बढ़ोतरी के बाद अतिरिक्त राशि आवंटन हेतु 2021-22 के बजट प्रस्ताव में भेजा जाएगा। बताते चले कि अब इस परियोजना को रेलवे बोर्ड द्वारा वरीयता के आधार पर पूरा करने की कोशिश की जा रही हैं। वर्ष 2016 और 2017 के बजट में परियोजना हेतु क्रमशः 110 करोड़ और 50 करोड़ रुपयों का आवंटन किया गया। भूमि अधिग्रहण के लिए अलग से 858 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे।

क्या है प्रोजेक्ट
पूर्वोत्तर भारत को सीमांचल-मिथिलांचल के रास्ते दिल्ली व अन्य राज्यों से जोड़ने वाली यह परियोजना 534 करोड़ की अनुमानित लागत से तत्कालीन रेलमंत्री लालू यादव द्वारा वित्तीय वर्ष 2006-07 के बजट में स्वीकृत हुई थी। तब इसकी रेट ऑफ रिटर्न माइनस 11.50% थी जो घटकर माइनस 8.70 रह गई है।

बारिश के बाद काम में तेजी की उम्मीद है
प्रोजेक्ट में पूर्ण भूमि मिलने के बाद निर्माण गतिविधियों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। बिहार सरकार ने बाकी बची भूमि जल्द ही सौपने की बात कही है। बारिश के बाद काम में तेजी की उम्मीद है।
संजीव रॉय,जीएम एनएफ रेलवे(कंस्ट्रक्शन)

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