पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

प्रेरणात्मक:टीके का दोनों डोज लेने के बाद भी हुए पॉजिटिव, होम आइसोलेशन में भी कोरोना संक्रमण रोकने के लिए करता रहा चिंतन, घबराया नहीं

डॉ. श्रीनंदन| कोरोना वारियर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कोरोना संक्रमित होने के बावजूद मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से जीती कोरोना से जंग

महामारी उम्र, ओहदे नहीं देखती। जरा सी असावधानी हुई कोरोना वायरस की चपेट में आ जाएंगे। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कब और किससे यह संक्रमण मुझ तक आया यह तो पता नहीं, लेकिन मरीजों के बीच रहते हुए यह तो तय था कि एक न एक दिन संक्रमित तो होना ही है। इसी सोच ने कोरोना का भय मन से निकाल दिया। 17 अप्रैल को तबियत कुछ गड़बड़ देख टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। खुद को आइसोलेट कर लिया, लेकिन कभी घबराया नहीं। सकारात्मक सोच के साथ आत्मबल को मजबूत रखा। नकारात्मक विचार को मन में कभी नहीं आने दिया। सरकारी फोन व निजी फोन भी हमेशा खुला रखा। अपने सहयोगी चिकित्सकों एवं अन्य मेडिकल स्टाफ को लगातार मॉनिटरिंग करता रहा। होम आइसोलेशन एवं कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों की देखभाल एवं उनतक सही उपचार पहुंच रहा या नहीं। लगातार नजर रखते हुए अपनी सेहत का भी खयाल रखा। मुझे अपनी जिम्मेदारी और जिले वासियों को समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का दायित्व ने दूना उत्साह दिया। कोविशील्ड का दोनों डोज लेने के बाद पॉजिटिव हुआ था। एक चिकित्सक होने के नाते मुझे इस बात का विश्वास था कि संक्रमण ज्यादा खतरनाक नहीं होगा। चूंकि वेक्सीन ले चुका था। इसके साथ साथ मेरे अंदर जल्द ठीक होने की जज्बा भी था। ताकि फिर से अपनी ड्यूटी पर जाकर जिले के लोगों को चिकित्सकीय सेवा देकर उनतक संक्रमण नही फैले इसका मुक्कमल इंतजाम करना भी मेरे हौसले को उड़ान देता रहा। आज छह दिन बाद मैं स्वस्थ होकर एक बार फिर कोरोना से लड़ाई के लिए तैयार हूं। (बतौर सिविल सर्जन डॉक्टर श्रीनन्दन जो पॉजिटिव हुए और अपना अनुभव साझा किया।)

वैक्सीन है कारगर
कोरोना से जंग जीतने के बाद सिविल सर्जन डॉ. श्रीनन्दन ने आमलोगों से अपील की है कि कोरोना से बचाव का वैक्सीन सबसे कारगर हथियार है। वैक्सीन अवश्य लें। साथ ही उन्होंने कोविड गाइडलाइन का अनुपालन करने और अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलने की अपील लोगों से की है।

खबरें और भी हैं...