चेहल्लुम:नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन की शहादत पर मुसलमानों ने सादगी से मनाया चेहल्लुम

गलगलिया2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मस्तान चौक पर जायजा लेते सर्किल इंस्पेक्टर व बीडीओ। - Dainik Bhaskar
मस्तान चौक पर जायजा लेते सर्किल इंस्पेक्टर व बीडीओ।
  • शहादत-ए-हुसैन के 40 दिन पूरे होने पर मुसलमान परिवारों में मनाई जाती है चेहल्लुम पर्व

कर्बला की जंग में अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन और शहीदाने करबला की याद में मनाया जाने वाला चेहल्लुम (चालीसा) मंगलवार को पूरे प्रखंड क्षेत्र में सादगी के साथ मनाया गया। इस्लामिक वर्ष के पहले माह मोहर्रम की 10 तारीख को कर्बला की जंग में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था। फातिमा के लाल की खता ये थी कि उन्होंने जालिमों के जुल्म और जब्र के आगे सर कटाना गवारा किया, लेकिन सर झुकाना नहीं। इसी क्रम में शहादते हुसैन के 40 दिन पूरे होने पर मुसलमानों द्वारा चेहल्लुम (चालीसा) मनाया जाता है। मिनारा जमा मस्जिद गलगलिया के मोहतमीम मौलाना मोहम्मद मसिउद्दीन ने बताया कि मोहर्रम माह के दसवीं तारीख को यजीद के सैनिकों ने कूफ़ा के कर्बला मैदान में हजरत इमाम हुसैन को नमाज पढ़ते वक्त शहीद कर दिया था। उस दिन लोग रोजा, कसरत से नमाज और कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं। पहलाम के 40 दिन पूरे होने पर चेहल्लुम (चालीसा) पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की प्रतीक है। वास्तव में इस का रिश्ता तो ‘’मरग-ए-यजीद’’ (इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद) से है। चेहल्लुम मुसलमानों के कैलेंडर के मुताबिक सफर के महीने की 20वीं तारीख को पड़ता है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस दिन मुसलमानों द्वारा हजरत इमाम हुसैन के नाम पर घर-घर नियाज, फातिहा, मिलाद, कुरानखानी, कराई जाती है। कहीं-कहीं जुलूस भी निकाली जाती है।

शहर के गांधी चौक पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकारी व पुलिसकर्मी।
शहर के गांधी चौक पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकारी व पुलिसकर्मी।

अखाड़ा का नहीं किया गया आयोजन

ठाकुरगंज| मुहर्रम के चालीस दिन बाद त्याग व बलिदान का पर्व चेहल्लुम पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। कोरोना महामारी के तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए अखाड़ा का भी आयोजन नहीं किया गया। लोगों ने हुसैन साहब को याद करते हुए अपने घरों में फातिया खानी की। सुन्नी जमात चालीसा मुहर्रम एकता कमेटी बशीरनगर के अध्यक्ष सोहराब उर्फ मुन्ना, कोषाध्यक्ष मो. मुश्ताक, सदस्य मो. रूस्तम ने बताया कि महामारी के खतरे को देखते हुए अखाड़ा नहीं निकाला गया। लोगों ने हुसैन साहब को याद करते हुए घरों में फातिया खानी की। शांति व भाईचारगी की दुआ मांगी। पर्व को लेकर सर्किल इंस्पेक्टर सुनील कुमार पासवान व बीडीओ सुमित कुमार स्वंय सुरक्षा का जायजा लेते देखे गये।

सादगी के साथ मनाया गया चेहल्लुम, सुरक्षा व्यवस्था के रहे पुख्ता इंतजाम

किशनगंज| जिले में मंगलवार को सादगी के साथ चेहल्लुम का पर्व मनाया गया। त्याग व बलिदान का पर्व चेहल्लुम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। शहादते हुसैन के 40 दिन पूरे होने पर मुसलमान भाईयों द्वारा चेहल्लुम पर्व मनाया जाता है। घासपट्टी मस्जिद के इमाम ने बताया कि मोहर्रम माह के 10वीं को यजीद के सैनिकों ने कूफ़ा के कर्बला मैदान में हजरत इमाम हुसैन को नमाज पढ़ते वक्त शहीद कर दिया था। इसलिए मोहर्रम के दशमी को पहलाम मनाया जाता है। उस दिन ही लोग नमाज और कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं। पहलाम के 40 दिन पूरे होने पर चेहल्लुम पर्व मनाया जाता है। इमाम साहब ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए सभी ने सादगी के साथ पर्व मनाया। कोरोना महामारी को देखते हुए जुलूस निकालने की इजाजत नहीं थी। इसलिए लोगाें ने अपने-अपने घरों में ही फातियाखानी करते हुए जल्द कारोना महामारी से निजात पाने के लिए दुआएं की। चेहल्लुम पर्व को लेकर पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चाक-चौबंद इंतजाम किये गये थे।

खबरें और भी हैं...