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ग्राउंड रिपोर्ट:अस्पताल में बच्चों के लिए न वेंटिलेटर, न एनआईसीयू गंभीर बच्चों को यहां से रेफर करना ही एक विकल्प

किशनगंज8 दिन पहले
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सदर अस्पताल में बनाया गया शिशु वार्ड। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में बनाया गया शिशु वार्ड।
  • कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए सदर अस्पताल पूरी तरह से तैयार नहीं
  • डॉक्टर ड्यूटी रूम, कंट्रोल रूम, ऑक्सीजन रूम और हेल्प डेस्क की व्यवस्था

कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को बचाने में सदर अस्पताल पूरी तरह से तैयार नहीं है। अस्पताल में गंभीर बच्चों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में न तो बच्चों के लिए न तो एनआईसीयू है और न ही वेंटिलेटर। बच्चों के लिए केवल एक डॉक्टर हैं। ऐसे में गंभीर बच्चों को इलाज के लिए बाहर भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। गौरतलब है कि दो दिन पहले तीन माह की बच्ची की कोरोना से मौत हो गई थी। सदर अस्पताल में एनआईसीयू नहीं होने से बच्ची को मधेपुरा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन बच्चे के परिजन वहां जाने में असमर्थ थे। अस्पताल में छह वेंटिलेटर थे। ऑपरेटर नहीं रहने के कारण इनमें से चार को महेशबथना स्थित कोविड केयर सेंटर में स्थापित करा दिया गया। सदर अस्पताल में बचे शेष दो वेंटिलेटर खराब हो गए हैं। संक्रमित बच्चों के उपचार के लिए बेहद जरूरी क्रिटिकल केयर यूनिट भी सदर अस्पताल में नहीं है। स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से मौजूद संसाधनों को तैयार करने में जुटी है। बच्चों को क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ी तो विभाग को मधेपुरा ही बेहतर इलाज के लिए रेफर करना होगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रावधान के अनुसार हम दूसरी जगह रेफर नहीं कर सकते। दो दिन पूर्व ही एक तीन महीने की बच्ची की कोरोना से मौत हो गयी। स्थिति गंभीर होने पर जरूरत के हिसाब से उस बच्ची को ईलाज की सुविधा नहीं मिली।

सदर अस्पताल में महज एक शिशु रोग विशेषज्ञ

सदर अस्पताल में महज एक ही शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेश कुमार हैं। इनकी सप्ताह में दो ही दिन ड्यूटी है। दूसरी ओर संभावित तीसरी लहर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयारी शुरू कर देने की बात सिविल सर्जन ने कही है। विगत गुरुवार को सदर अस्पताल में चाइल्ड फ्रेंडली डेडिकेटेड पीडियाट्रिक वार्ड का जिला पदाधिकारी ने उद्घाटन किया है। संक्रमण के तीसरे वेब को देखते आधुनिक तकनीक के साथ ऑक्सीजन युक्त 10 बेड वाला बच्चा वार्ड बनाया गया है। 10 बेड पूरी तरह से वातानुकूलित एवं पाइपलाइन ऑक्सीजन युक्त रहेंगे। जरूरत के अनुसार इन बेड की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। वार्ड में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के उपचार के लिए आवश्यक चिकित्सीय सुविधाओं की व्यवस्था का दावा किया गया है।

चिकित्सा कर्मी और पारामेडिकल कर्मी 24 घंटे रहेंगे तैनात : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. श्रीनंदन ने कहा कि शिशु वार्ड में चिकित्सक एवं पारामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की गयी है। जो रोस्टर के अनुसार 24 घंटे रहकर कार्य करेंगे। साथ ही, डॉक्टर ड्यूटी रूम, कंट्रोल रूम, ऑक्सीजन रूम व हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गयी है। आमजनों को हॉस्पिटल भवन खोजने में दिक्कत ना हो, इसलिए प्रवेश द्वार से ही हॉस्पिटल तक पहुंचने के लिए जगह जगह रास्ते में साइनेज लगाया गया है। वार्ड को बिल्डिंग एज लर्निंग ऐड के तर्ज तैयार किया गया है। वार्ड का वातावरण जिस प्रकार तैयार किया गया है कि छोटे बच्चों को वहां घर जैसा माहौल प्राप्त हो सके।

तीसरे वेब से निपटने की तैयारी जारी
सिविल सर्जन डॉक्टर श्रीनन्दन ने कहा कि संक्रमण के तीसरे वेब से निपटने की तैयारी जारी है। बच्चों के लिए 10 बेड का वार्ड तैयार है। जिसमें आईसीयू तो नहीं लेकिन उसी तर्ज पर ऑक्सीजन युक्त बेड की व्यवस्था की गई है जो पूरी तरह वातानुकूलित होगा। इसके अलावे सदर अस्पताल के ऊपरी तल्ले पर भी 30 बेड का वार्ड बनाया जा रहा है।

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